एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च जहां 10 हजार लोग कर सकते हैं प्रार्थना
जशपुर। रोजरी की महारानी नाम से मशहूर यह महागिरजाघर ईसाई धर्मावलंबियों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी क्षेत्र में स्थित इस चर्च को एशिया के दूसरे सबसे बड़े गिरजाघर होने का गौरव प्राप्त है। एशिया का सबसे बड़ा चर्च सुमी बैप्टिस्ट चर्च ज़ूनहेबोटो, नागालैंड में है। वहीं, दुनिया का सबसे बड़ा चर्च सेंट बेसिलिका चर्च वेटिकन सिटी में है। रोजरी की महारानी चर्च में 10 हजार व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है, जो यहां एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं।
जर्मन वास्तुकला पर आधारित इस चर्च का निर्माण एक ही बीम पर किया गया है, जिसके सहारे सात छतें टिकी हैं। सफेद संगमरमर से बना इस चर्च के निर्माण में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है। बिशप स्तानिसलास ने बेल्जियम के सुप्रसिद्ध वास्तुकार कार्डिनल जेएम कार्सी एसजे से इसका नक्शा बनवाया था। 1962 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ, जो 1979 में पूरा हुआ। नाम रखा गया रोजरी की महारानी। इसे धर्म प्रांत की संरक्षिका का दर्जा दिया गया।
चर्च में स्थापित जीजस क्राइस्ट की मूर्ति के समीप सभी धर्मों के प्रतीक चिह्न अंकित हैं, जो धार्मिक सद्भाव का संदेश देते हैं। जिले में दो लाख ईसाई धर्मावलंबी आदिवासी बाहुल जशपुर जिले में उरांव, कंवर, कोरवा, गोंड आदि जनजातियों की बड़ी संख्या है। इनमें भी सर्वाधिक संख्या उरांव जनजाति की है। जशपुर जिले की आबादी करीब 8 लाख 50 हजार है। इनमें से करीब दो लाख ईसाई धर्मावलंबी हैं। इन ईसाईयों में से अधिकांश उरांव जनजाति के हैं, जिन्होंने मिशनरियों के प्रभाव से ईसाई धर्म को अपना लिया है।

