एरियल बम की ढलाई में जीआईएफ को महारत,2 सौ करोड़ के उत्पादन लक्ष्य में 70 फीसदी काम पूरा
जबलपुर, विशेष प्रतिनिधि। कभी काम की कमी और अपने अस्तित्व के लिए जूझने वाली ग्रे आयरन फाउण्ड्री ने उत्पादन की दिशा में परिवर्तन कर न केवल स्थापित कर लिया है। अपितु गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन के साथ आयुध निर्माणी बोर्ड की मुनाफज्ञ कमाने वाली इकाई बन चुकी है। जानकारी के अनुसार जीआईएफ को वर्ष 2016-17 के लिए सौ और 120 किलो के एरियल बम के खोल को ढालने के लिए 10 हजार का लक्ष्य मिला था। इसके साथ एस2 ए और सी43 बकसे जिन्हें सरकार निजी क्षेत्र को देना चाहती हो बनाने के लिए 2 सौ करोड़ के उत्पादन का लक्ष्य मिला था। निर्माणी ने उस लक्ष्य में से 70 फीसदी काम कर अपनी श्रेष्ठता सिद्घ कर दी। इसके साथ ही सी 43 और एस 2ए बाक्स जिन्हें निजी क्षेत्र में बनवाने का निश्चय किया गया था। अपने तय समय में पूरा करने जा रही जानकर सूत्रों के अनुसार उक्त उत्पादन में अनेक पुर्जे हैं जो बाहर से मंगाये जाते हैं। यदि बाहर से जाने वाले पुर्जे समय पर उपलब्ध हो जायें तो उत्पादन लक्ष्य समय के पूर्व भी हो सकता है। उल्लेखनीय है कि जीआईएफ की स्थापना व्हीकल फैक्टरी की सहायक इकाई के रूप में हुई थी। व्हीकल फैक्अरी का काम समेटने के कारण जीआईएफ के अस्तित्व पर संकट आ गया था लेकिन जीआईएफ प्रबंधन ने व्हीकल पर निर्भर न होने का निश्चय किया और अपनी दिशा बदल दी। जीआईएफ ने ससेना के लिए उपयोग किये जाने वाले मल्टीमोड हैण्ड ग्रेनेड को ढालने काकाम लेकर उसका रिकॉर्ड उत्पादन किया था। लेकिन हेण्ड ग्रेनेड का काम जीआईएफ से छीन लिया गया था। सूत्रों के अनुसार इस बार जीआईएफ को विभिन्न बमों के खोल को ढालने के साथ ही अन्य सामानों का उत्पादन लक्ष्य दिये जाने की संभावना है।








