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एनआइए की 13 सदस्यीय टीम जबलपुर पहुंची  

 

जबलपुर। सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो (सीओडी) से एके-47 चोरी कर तस्करों के माध्यम से आतंकियों, नक्सलियों और बदमाशों को बेचे जाने के प्रकरण में गिरफ्तार रिटायर्ड आर्मरर पुरुषोत्तम, उसकी पत्नी चंद्रवती, बेटा शीलेंद्र और सीनियर स्टोर मैनेजर सुरेश ठाकुर को एनआइए की टीम मुंगेर ले गई। इससे पहले बिहार पुलिस ने अपनी ट्रांजिट रिमांड खारिज करा दी थी। एनआइए के जिले में आने से सीओडी में भी हलचल बढ़ गई है। गोरखपुर पुलिस इस प्रकरण की जानकारी तैयार करने में जुटी है। एके-47 मामले में बिहार के मुंगेर पुलिस ने 16 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। एनआइए डीएसपी एनके मालवीय की अगुवाई में 13 सदस्यीय टीम मामले की जांच करने पहुंची है।

ये होना है-
एके-47 हथियारों को लेकर मुंगेर जाने वाला पुरुषोत्तम भागलपुर में साईं इंटरनेशनल और एमएस होटल में ठहरता था। टीम वहां के वेटर, मैनेजर के बयान दर्ज करेगी। इसके चलते पुरुषोत्तम व उसकी पत्नी को टीम ले गई। सुरेश ठाकुर इस मामले में अहम कड़ी है। सीओडी के गोदाम से सुरेश ठाकुर ही पाट्र्स के रूप में एके-47 निकाल कर पुरुषोत्तम रजक तक पहुंचाता था। पुरुषोत्तम उसे असेम्बल कर तस्करों तक पहुंचाता था।

एफएसएल जांच के लिए भेजा-
एनआइए ने मुंगेर पुलिस की ओर से अब तक जब्त किए गए 20 व बेगूसराय में जब्त दो एके-47 रायफलों को पटना के विधि विज्ञान प्रयोगशाला में फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है।

सीओडी से मांगी जानकारी-
एनआइए ने जबलपुर ऑर्डनेंस फैक्ट्री के डीपो इंचार्ज से से ब्योरा मांगा है कि कब-कब ऑडिट हुआ। अंतिम समय में कब हथियारों की गिनती एवं सत्यापन हुआ। गोदाम में रखे गए असलहों का आर्सलर नम्बर क्या है?
गौर व तिलवारा में फेंके गए पाट्र्स की जब्ती की चुनौती- पुरुषोत्तम ने जहां गौर नदी में तो सुरेश ठाकुर ने सीओडी से चुराए गए कई पाट्र्स तिलवारा में फेंके जाने की बात स्वीकार की थी। इसकी जब्ती क्राइम ब्रांच नहीं कर पाई है।

2002 में एसएलआर से शुरू हुई थी तस्करी
क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आए पुरुषोत्तम और मुंगेर पुलिस की गिरफ्त में आए सेना के लांस नायक नियाजुल रहमान ने बताया कि 2002 में लखनऊ में तैनाती के दौरान उनकी मुलाकात हुई थी। उसी ने तस्कर शमशेर व इरफान से परिचय कराया था। कुछ समय बाद ही उसका तबादला जबलपुर सीओडी में हो गया। तब उसने पहली बार एसएलआर निकाला था। उसने 15 एसएलआर जमालपुर स्टेशन तक पहुंचाया था। वर्ष 2012 में पहली बार पुरुषोत्तम ने तीन एके-47 रायफल शमशेर व इरफान को पहुंचाई।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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