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इस फैसले के साथ ही 157 साल पुराना कानून खत्म हो गया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने आईपीसी की धारा 497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि विवाह से अलग संबंध बनाना गलत नहीं। इस फैसले के साथ ही 157 साल पुराना कानून खत्म हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि अब शादी के बाहर के संबंध अपराध नहीं। इसी के साथ आईपीसी की धारा 497 रद्द कर दी गई। आइए जानते हैं कि व्यभिचार से जुड़ी आईपीसी की धारा 497 क्या है और इसके तहत कैसे एक विवाहित पुरुष को व्यभिचार का दोषी मानते हुए सजा दी जाती थी।

ये है धारा 497

आईपीसी की धारा 497 के तहत अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी शादीशुदा महिला के साथ रजामंदी से संबंध बनाता है तो उस महिला का पति एडल्टरी के नाम पर इस पुरुष के खिलाफ केस दर्ज कर सकता है। लेकिन वो अपनी पत्नी के खिलाफ किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। साथ ही इस मामले में शामिल पुरुष की पत्नी भी महिला के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं करवा सकती है। इसमें ये भी प्रावधान है कि विवाहेतर संबंध में शामिल पुरुष के खिलाफ केवल उसकी साथी महिला का पति ही शिकायत दर्ज कर कार्रवाई करा सकता है।

इतनी सजा का था प्रावधान

व्यभिचार से जुड़ी आईपीसी की धारा 497 के तहत अगर किसी पुरुष पर अवैध संबंध का आरोप साबित हो जाता है तो इसे अधिकतम सजा पांच साल की होती है। इस तरह के मामले की शिकायत किसी पुलिस स्टेशन में नही हो सकती, बल्कि मजिस्ट्रेट के सामने की जाती है और सारे सबूत पेश करने होते है। सबूत पेश होने के बाद संबंधित व्यक्ति को समन भेजा जाता है।केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि, आईपीसी की धारा 497 और सीआरपीसी के सेक्शन 198(2) को रद्द करना भारतीय परंपरा और मूल्यों के नुकसानदायक होगा, क्योंकि भारत में विवाह जैसी संस्था और उसकी पवित्रता को सबसे ऊपर रखा जाता है। सरकार के मुताबिक एडल्टरी एक अपराध ही रहना चाहिए, इसे खत्म करने से विवाह की पवित्रता पर असर पड़ेगा।

लेकिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने कानून को रद्द कर दिया। फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविल्कर ने कहा कि, “हम आईपीसी की धारा 497 और सीआरपीसी के सेक्शन 198 को रद्द करते हैं।”

जस्टिस नरीमन ने कहा कि एडल्टरी अपराध नहीं, विवाह से संबंध तलाक का आधार हो सकता है, चीन जापान में भी एडल्टरी अपराध नहीं है।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, धारा 497 के तहत सिर्फ पुरुष को ही दोषी माना जाना IPC का एक ऐसा प्रावधान है कि जिसमें केवल एक पक्ष को ही दोषी माना जाता है। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि अगर विवाहित महिला के पति की सहमति से कोई विवाहित पुरुष संबंध बनाता है तो वह अपराध नहीं है। इसका मतलब क्या महिला पुरुष की निजी मिल्कियत है कि वह उसकी मर्जी से चले।

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