इंदौर जाने की तैयारी में स्टेट कैंसर अस्पताल
जबलपुर । स्टेट कैंसर अस्पताल के लिए अभी तक केन्द्र सरकार से 85 करोड़ का फंड नहीं आया है। इससे इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि इसे इंदौर ले जाने की भी सुगबुगाहट भी चल रही है, लेकिन वित्त मंत्री ने साफ कहा है कि स्टेट कैंसर अस्पताल यहीं रहेगा।
स्टेट कैंसर अस्पताल को यूपीए सरकार ने 2014 ने स्वीकृत किया था।
बड़ा यूनिट बनाने का था प्रस्ताव
यूपीए सरकार ने प्रदेश में एक स्टेट कैंसर अस्पताल और दो टरर्शी कैंसर अस्पताल स्वीकृत किए थे। स्टेट कैंसर अस्पताल में तीन बड़ी मशीनें और टरर्शी कैंसर अस्पताल में एक मशीन लगनी है। टरर्शी छोटा यूनिट है जबकि स्टेट कैंसर अस्पताल बड़ा यूनिट बनाने का प्रस्ताव था। तत्कालीन सरकार ने मध्यप्रदेश में स्टेट कैंसर अस्पताल जबलपुर में और टरर्शी कैंसर यूनिट को ग्वालियर और विदिशा में शुरू करने आदेश दिए गए थे।
135 करोड़ की लागत स्वीकृत
स्टेट कैंसर अस्पताल के लिए 135 करोड़ की लागत स्वीकृत हुई थी। इसमें 85 करोड़ की राशि केन्द्र सरकार को देनी है इससे उपकरण आने हैं। शेष राशि राज्य सरकार को देनी है। राज्य सरकार ने अपना अंशदान दे दिया है। राज्य सरकार ने इसके लिए 20 करोड़ अतिरिक्त राशि पिछले साल भी पिछले साल स्वीकृत कर दी है। भवन निर्माण का काम मार्च तक पूरा हो सकता है।
भोपाल में बैठक
केन्द्र सरकार से अभी तक नही मिला फंड
स्टेट कैंसर अस्पताल पर भोपाल में दिसम्बर में अधिकारियों ने बैठक ली। जिसमें केन्द्र सरकार से फंड नहीं मिलने पर इसे पब्लिक – प्राइवेट पार्टनरशिप में मशीन लगाए जाने का निर्णय हुआ। कैंसर पीडि़तों की जांच के लिए लीनियर एक्सलेरेटर मशीन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में लगाई जा सकती है। अस्पताल के भवन निर्माण का काम पूरा हो चुका है। कैंसर अस्पताल के भवन निर्माण का काम अंतिम स्टेज पर पहुंच चुका है। यह मार्च तक पूरा हो सकता है।
स्टेट कैंसर अस्पताल जबलपुर में ही रहेगा। इसके लिए जो समस्याएं आ रही हैं उसका निदान कर लिया जाएगा।
तरुण भानोत
वित्त मंत्री

