आखिरकार पीछे हटा ड्रैगन, रंग लाई 48 घंटे की कूटनीतिक और सैन्य बातचीत

20 06 2020 galwan bridge20

वेब डेस्‍क। गलवां घाटी पर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के बीच दोनों सेनाएं पीछे हटना शुरू हो गई हैं। यह पिछले 48 घंटों में हुई गहन कूटनीतिक, सैन्य बातचीत और संपर्कों का परिणाम है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी का इंतजार है। इन बैठकों के बाद पीएम मोदी की लेह यात्रा हुई, जहां से चीन को एक निर्णायक और दृढ़ संदेश भेजा गया।

इससे पहले रविवार को खबर आई थी कि सीमा पर आठ हफ्तों से जारी गतिरोध के बीच नई दिल्ली सीमा वार्ता पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) तंत्र को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है। इसमें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल अपने चीनी समकक्ष चीन के स्टेट काउंसिलर और विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत करेंगे। जिसका एकमात्र उद्देश्य स्थिति को सामान्य करना होगा।

वहीं चीन के पूर्वी लद्दाख में कुछ प्वाइंट पर पीछे हटने के संकेत पांच दिन पहले हुई कॉर्प्स-कमांडर स्तर की वार्ता में मिल गए थे। जब दोनों देशों की सेनाएं चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने के लिए तैयार हुई थीं। इसके तहत, दोनों पक्षों को मैनपावर और संरचनाओं को वापस लेना था और पांच जुलाई को इसका एक सत्यापन किया जाना था। सूत्रों ने कहा, ‘सेना की टीमें कुछ प्वाइंट्स पर सत्यापन करने के लिए गईं, जहां सेनाओं के बीच गतिरोध जारी है।’

एक वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिष्ठान अधिकारी ने कहा था, ‘गलवां क्षेत्र से मैनपावर की वापसी और संरचनाओं के विघटन का विस्तृत विवरण कल मिल जाएगा।’ जैसी की अधिकारी ने आशंका जताई थी, आज चीनी सैनिक कुछ किलोमीटर पीछे हट गए हैं। अधिकारी ने कहा था, ‘हमें नहीं पता कि यह जानबूझकर किया गया है नहीं। अगले कुछ दिनों में मौसम खराब हो जाएगा। गलवां नदी में पानी बढ़ सकता है। जिसके कारण उनकी गतिविधियां धीमी हो जाएंगी।’

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चीनी सेना के पीछे हटने का एक कारण गलवां नदी के बढ़ते जलस्तर को भी माना जा रहा है। बर्फ से ढकी गलवां नदी जो अक्साई चीन क्षेत्र से निकलती है उसका जल स्तर तापमान में बढ़ोतरी के कारण बढ़ रहा है। एक वरिष्ठ सेनाधिकारी ने कहा था, ‘तीव्र गति से बर्फ पिघलने की वजह से नदी तट पर कोई भी स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसके कारण चीनी टेंट बाढ़ में डूब सकते हैं।’