अगर फट गए होते हैंड ग्रेनेड तो नहीं खोना पड़ता नौ जवानों को

जगदलपुर।नक्सलियों से मोर्चा ले रहे सीआरपीएफ जवानों को सरकार ने अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया है। इसके बावजूद ऐन मोर्चा के वक्त यूबीजीएल व ग्रेनेड जैसे शस्त्र चूक रहे हैं। मंगलवार को सुकमा जिले के किस्टाराम ब्लास्ट के बाद जवानों की ओर से दागे गए तीन ग्रेनेड नाकाम साबित हुए।
यदि ये फटते तो निश्चित रूप से नक्सलियों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता था। वहीं नौ जवानों को खोना नहीं पड़ता। इसके पीछे प्रमुख वजह पुराने शस्त्रों को आउट ऑफ नहीं करना बताया जा रहा है। ढाई दशक से अधिक समय से नक्सलियों के विरुद्ध बस्तर में तैनात अर्धसैन्य बलों के पास होममेड इंसास, एसएलआर, एलएमजी, कार्बाइन, हैंड ग्रेनेड 2 इंच मोर्टार आदि परंपरागत हथियारों समेत आधुनिक मेड इन इजराइल एक्स 95 असाल्ट रायफल, अंडर बेरल ग्रेनेड लांचर यूबीजीएल, 51 इंच मोर्टार, हाई एक्सप्लोजिव बम आदि हथियार मौजूद हैं।
यूबीजीएल को जंगलवार फेयर में सबसे मुफीद शस्त्र माना जाता रहा है। मंगलवार को किस्टाराम में नक्सलियों द्वारा एमपीवी को उड़ाने के बाद जवानों की ओर से दागे गए तीन राउंड ग्रेनेड फटे ही नहीं, जबकि इसकी मारक क्षमता 15 मीटर तक होती है।
सूत्रों की मानें तो एक वर्ष से अधिक की अवधि के बाद इस बम की क्षमता कम हो जाती है। लिहाजा इसे आउट ऑफ किया जाकर नए बम प्रदान किए जाना चाहिए था। यूबीजीएल के मिस फायरिंग होने के पीछे विशेषज्ञों की मानें तो ग्रेनेड में नमी व अन्य तकनीकी कारण बताए जा रहे हैं।
सीआरपीएफ समेत बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी समेत अन्य अर्धसैन्य बलों के आधुनिकीकरण व अत्याधुनिक हथियार से लैस किए जाने की योजनाएं पिछले कई वर्षों से बनाई जा रही है।
हाल में ही रक्षा मामलों की संसदीय स्थाई समिति की ओर से संसद में पेश रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि देश में मौजूदा सैन्य शस्त्रों में केवल 24 फीसदी ही आधुनिक हैं, शेष पुराने हथियार हैं। समिति ने रक्षा बजट को नाकाफी बताते हुए मंत्रालय को फटकार लगाई है। साथ ही सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर दिया है।
सीआरपीएफ के पास मौजूद उम्दा हथियार
एक्स 95 असाल्ट रायफल- यह इजराइल निर्मित आधुनिक लाइटवेट रायफल है। जंगलवार में इसे उपयोगी माना जाता है। इससे लगातार 240 राउंड फायर किया जा सकता है। 51 एमएम मोर्टार- दो इंच मोर्टार की खामियों को दुरुस्त कर इसे अपग्रेड किया गया है। यह तीन मिनट की अवधि में 12 बम दाग सकता है।
15 मीटर की रेंज तक शत्रु को मारने में सक्षम है। एचई जिंदा ग्रेनेड- आठ मीटर तक मारक क्षमता है। इसके फायर से 270 मीटर तक शत्रु घायल हो सकता है। यूबीजीएल- ग्रेनेड की सीरिज में सबसे उम्दा माना जाता है। इसके एके सीरिज व अन्य असाल्ट रायफल की ट्रिगर में फंसाकर दागा जाता है। इसकी मारक क्षमता करीब 15 से 20 मीटर होती है। पेड़ पर चढ़े, पहाड़ियों में छिपे शत्रु पर हमले में कारगर है।







