US-Iran Peace Deal: दुनिया को बड़ी राहत! 108 दिन के खूनी खेल के बाद अमेरिका और ईरान में ऐतिहासिक पीस डील; तेल पर से हटेंगी पाबंदियां
US-Iran Peace Deal: दुनिया को बड़ी राहत! 108 दिन के खूनी खेल के बाद अमेरिका और ईरान में ऐतिहासिक पीस डील; तेल पर से हटेंगी पाबंदियां
US-Iran Peace Deal: दुनिया को बड़ी राहत! 108 दिन के खूनी खेल के बाद अमेरिका और ईरान में ऐतिहासिक पीस डील; तेल पर से हटेंगी पाबंदियां
जिनेवा : वैश्विक अर्थव्यवस्था और मिडिल-ईस्ट (मध्य-पूर्व) के संकट के बीच विश्व जगत के लिए राहत की सबसे बड़ी खबर है। पूरे 108 दिनों तक चले भीषण खून-खराबे और तनाव के बाद आखिरकार संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान स्थायी युद्धविराम (Permanent Ceasefire) के लिए राजी हो गए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते के साथ ही दुनिया भर पर मंडरा रहा तेल संकट और तेलबंदी का खतरा अब खत्म होने जा रहा है।
आगामी 19 जून 2026 (शुक्रवार) को स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि इस महा-पीस डील (शांति समझौते) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे।
ईरान की वो ’14 कड़क शर्तें’, जिन पर घुटनों पर आया अमेरिका
समझौते से ठीक पहले ईरानी मीडिया ने इस महा-डील के पीछे की उन 14 प्रमुख शर्तों को सार्वजनिक कर दिया है, जिनके बिना ईरान अंतिम बातचीत की मेज पर आने को तैयार नहीं था। ईरान का साफ रुख है कि जब तक उसके फ्रीज किए गए फंड में से 12 अरब डॉलर तुरंत जारी नहीं होते और तेल नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक बात आगे नहीं बढ़ेगी।US-Iran Peace Deal: दुनिया को बड़ी राहत! 108 दिन के खूनी खेल के बाद अमेरिका और ईरान में ऐतिहासिक पीस डील; तेल पर से हटेंगी पाबंदियां
ईरान की प्रमुख शर्तें
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प्रतिबंधों का खात्मा: ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल्स और उससे जुड़े सभी एक्सपोर्ट (निर्यात) पर लगी वैश्विक पाबंदियां तुरंत हटाई जाएंगी।
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वित्तीय संसाधनों का एक्सेस: ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और अपने वित्तीय संसाधनों का पूरा एक्सेस फिर से मिलेगा।
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$24 अरब डॉलर की रिहाई: 60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान के फ्रीज (जब्त) किए गए 24 अरब डॉलर जारी होंगे, जिसमें से 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले ही देने होंगे।
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पुनर्निर्माण फंड: अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का वित्तीय प्लान पेश करना होगा।
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लेबनान मोर्चा: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी सैन्य युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए बंद करना होगा।
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संप्रभुता का सम्मान: अमेरिका भविष्य में कभी भी ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने का लिखित वादा करेगा।
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नौसैनिक नाकेबंदी का अंत: अमेरिका द्वारा समुद्र में लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाना होगा।
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अमेरिकी सेना की वापसी: अमेरिकी सेनाएं ईरान की भौगोलिक सीमाओं के आसपास के इलाकों से पीछे हटेंगी।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के तहत 30 दिनों के भीतर व्यापार के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।
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60 दिनों का रोडमैप: परमाणु मुद्दों और पाबंदियों को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए 60 दिनों की एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत शुरू होगी।
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NPT का वादा: ईरान परमाणु हथियार न बनाने के अपने एनपीटी (Non-Proliferation Treaty) के वादे को फिर से दोहराएगा।
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सैन्य फ्रीज: अमेरिका बातचीत के इस दौर के दौरान मध्य-पूर्व में अपनी सेना नहीं बढ़ाएगा और न ही कोई नया प्रतिबंध लगाएगा।
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UNSC की मुहर: एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र इस पूरी डील पर नज़र रखेगा और अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव से मंज़ूरी दिलाई जाएगी।
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नो-कॉम्प्रोमाइज जोन: ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके ‘रेसिस्टेंस ग्रुप्स’ (प्रतिरोध समूहों) को मिलने वाले समर्थन के मुद्दे पर अमेरिका से कोई बातचीत नहीं की जाएगी।
सबसे बड़ा प्रश्न: क्या बेंजामिन नेतन्याहू इस डील से खुश हैं?
इस महा-शांति समझौते के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस और भू-राजनीतिक पेंच इजरायल को लेकर फंस गया है। सवाल यह है कि क्या इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस डील को स्वीकार करेंगे?
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बेरूत में बमबारी: ईरान की शर्तों में पहले नंबर पर लेबनान में युद्धविराम शामिल है, लेकिन इस समझौते की खबर के बीच महज 24 घंटे पहले इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर फिर से भीषण हवाई हमले कर दिए हैं।
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ट्रंप की परीक्षा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने सबसे करीबी सहयोगी नेतन्याहू को मनाने की होगी। क्या ट्रंप के दबाव में इजरायली फौज लेबनान से पीछे हटेगी, या फिर इजरायल का अड़ियल रुख इस ऐतिहासिक शांति समझौते को खटाई में डाल देगा? इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।








