Wednesday, May 20, 2026
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ट्विशा शर्मा केस: AIIMS मोर्चरी में -4°C तापमान, शव सुरक्षित रखने के लिए चाहिए -80°C; पुलिस ने पत्र लिख परिवार से की ये भावुक अपील

ट्विशा शर्मा केस: AIIMS मोर्चरी में -4°C तापमान, शव सुरक्षित रखने के लिए चाहिए -80°C; पुलिस ने पत्र लिख परिवार से की ये भावुक अपील। राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश की बहू और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला सुलझने के बजाय और उलझता जा रहा है। 12 मई को हुई मौत के बाद आज 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मृतका का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। ट्विशा का शव फिलहाल एम्स (AIIMS) भोपाल की मोर्चरी में रखा हुआ है। इसी बीच, भोपाल पुलिस ने मृतका के माता-पिता को एक आधिकारिक पत्र भेजकर शव को ससम्मान ले जाने और अंतिम संस्कार करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि लंबे समय तक मोर्चरी में रखने से शव के खराब (डीकंपोज) होने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।

ट्विशा शर्मा केस: AIIMS मोर्चरी में -4°C तापमान, शव सुरक्षित रखने के लिए चाहिए -80°C; पुलिस ने पत्र लिख परिवार से की ये भावुक अपील

AIIMS में -80°C की सुविधा नहीं, सबूत नष्ट होने का खतरा

18 मई को एम्स भोपाल प्रशासन की ओर से पुलिस को एक बेहद महत्वपूर्ण और तकनीकी रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने परिवार को चिट्ठी लिखी है।

  • तापमान का पेंच: एम्स भोपाल की मोर्चरी का वर्तमान तापमान -4 डिग्री सेल्सियस है। डॉक्टरों के मुताबिक, शव को हफ्तों या महीनों तक बिना किसी प्राकृतिक बदलाव के पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस के डीप-फ्रीजर की जरूरत होती है, जो फिलहाल एम्स भोपाल में उपलब्ध नहीं है।

  • डीकंपोजिशन की आशंका: इतनी कम कूलिंग क्षमता के कारण शव के धीरे-धीरे सड़ने या डीकंपोज होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जिससे वैज्ञानिक साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।

‘दिल्ली AIIMS भेजो, सबूत नष्ट करना चाहता है सिस्टम’ — पीड़ित परिवार

दूसरी तरफ, मृतका ट्विशा के भाई (जो भारतीय सेना में मेजर हैं) और उनके पिता नवनिधि शर्मा अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। वे शुरुआत से ही इसे आत्महत्या नहीं बल्कि दहेज उत्पीड़न और हत्या का मामला बता रहे हैं।

ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने गंभीर सवाल उठाए: > “एम्स देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था है। अगर भोपाल एम्स के पास शव को सुरक्षित रखने के इंतजाम नहीं हैं, तो हमारी बहन के पार्थिव शरीर को तत्काल दिल्ली एम्स रेफर किया जाए। हमें डर है कि अगर बॉडी डीकंपोज हुई तो मौत से जुड़े सारे जरूरी फॉरेंसिक सबूत हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे। हम भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं और दिल्ली एम्स में री-पोस्टमार्टम (दुबारा शव परीक्षण) के बाद ही अंतिम संस्कार करेंगे।”

परिजनों का आरोप है कि पहली पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान पुलिस ने वह बेल्ट डॉक्टरों के सामने पेश ही नहीं की, जिससे कथित तौर पर खुदकुशी की बात कही जा रही है। साथ ही गर्दन पर मिले निशानों (लिगेचर मार्क्स) की जांच भी वैज्ञानिक तरीके से नहीं की गई।

पुलिस का बड़ा दावा: मर्डर नहीं ‘सुसाइड’ था, कोर्ट के पाले में गेंद

इसी बीच भोपाल पुलिस ने शुरुआती पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक इनपुट्स के आधार पर बड़ा दावा किया है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, यह मामला ‘एंटी-मॉर्टम हैंगिंग’ यानी फांसी लगाने के कारण दम घुटने (आत्महत्या) का है।

पुलिस ने साफ किया है कि दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति देने का अधिकार उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। पुलिस ने पत्र में लिखा है कि “हमें दिल्ली एम्स या कहीं भी दोबारा पोस्टमार्टम कराने पर कोई कानूनी आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए परिवार को सक्षम अदालत (Court) से आदेश लाना होगा।” फिलहाल मामला कोर्ट में है और मृतका के पति समर्थ सिंह व सास (रिटायर्ड जज) के खिलाफ दर्ज मामले की एसआईटी (SIT) जांच की मांग की जा रही है।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि