इस साल मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी? जानिए तिथि, पुण्यकाल, दान और खास संयोग व धार्मिक महत्व

04 01 2021 makar sankranti 2021 timings

धर्म डेस्क। मकर संक्रांति को लेकर हर वर्ष लोगों के मन में तिथि को लेकर भ्रम बना रहता है। वर्ष 2026 में भी यही सवाल है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी या 15 जनवरी को। पंचांग के अनुसार, इस बार मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026, बुधवार को ही मनाया जाएगा।

दोपहर बाद होगा सूर्य का गोचर, फिर भी 14 जनवरी को पर्व

पंचांग के मुताबिक सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 6 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। हालांकि सूर्य का गोचर दोपहर बाद हो रहा है, इसके बावजूद धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संक्रांति का पुण्यकाल उसी दिन मान्य रहेगा।

इस बार मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 8 बजकर 42 मिनट से शुरू होगा, जिसमें स्नान, दान और धार्मिक कर्म करना अत्यंत शुभ माना गया है।

षटतिला एकादशी और संक्रांति का दुर्लभ संयोग

इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का विशेष संयोग भी बन रहा है। ऐसे में इस दिन सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग दान, जप और तप के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

क्या इस बार चावल और खिचड़ी का दान होगा?

मकर संक्रांति के दिन एकादशी तिथि होने के कारण चावल का सेवन वर्जित माना गया है। हालांकि, चावल का दान किया जा सकता है। वहीं 17 जनवरी, शनिवार को आप खिचड़ी बनाकर स्वयं ग्रहण कर सकते हैं और खिचड़ी का दान-पुण्य भी कर सकते हैं।

मकर संक्रांति पर क्या करें

  • इस दिन तिल, गुड़, गरम कपड़े और खिचड़ी का दान करें। मान्यता है कि इससे पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करना शुभ माना गया है।
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मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व

मकर संक्रांति का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह तीरों की शय्या पर रहते हुए उत्तरायण (मकर संक्रांति) की प्रतीक्षा करते रहे और इसी दिन उन्होंने स्वेच्छा से अपने प्राण त्यागे।
इसी कारण मकर संक्रांति और उत्तरायण को अत्यंत पुण्यदायी पर्व माना गया है। कुल मिलाकर, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी, जिसमें शुभ योग और विशेष संयोग इसे और भी खास बना रहे हैं।