इससे निपटने की जरूरत है…सरकार के वक्फ संपत्तियों आंकड़ों को लेकर बोला सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह वक्फ संशोधन अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा पेश वक्फ संपत्तियों के संबंध में आंकड़ों की जांच करेगा, जिस पर दूसरे पक्ष ने विवाद किया है. इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने की. इसमें जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन शामिल थे.

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “हमने दलीलों पर गौर किया. हां, पंजीकरण और आंकड़ों पर कुछ मुद्दे उठाए गए हैं, जिन पर याचिकाकर्ताओं ने विवाद किया है. इस पर विचार किए जाने की जरूरत है…” सीजेआई ने कहा कि इस मामले की सुनवाई किसी भी उचित दिन होनी चाहिए.

सीजेआई को शर्मिंदा नहीं करेंगे

केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह पीठ के समक्ष मामले को उठाने की कोशिश करते क्योंकि हर दलील का जवाब होता है, लेकिन वह सीजेआई को शर्मिंदा नहीं करेंगे क्योंकि उनके पास समय नहीं है. सीजेआई, जो 13 मई को पद छोड़ने वाले हैं ने कहा कि वह लास्ट फेज में भी मामले में फैसला सुरक्षित नहीं रखना चाहेंगे. सीजेआई ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 15 मई को सीजेआई नामित जस्टिस बी आर गवई की अगुवाई वाली पीठ द्वारा की जाएगीय

वक्फ कानून में लाए गए संशोधनों का बचाव करते हुए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि ऐसे कई उदाहरण हैं जो यह स्थापित करते हैं कि कैसे वक्फ बाय यूजर और वक्फ बोर्ड द्वारा किसी भी भूमि को स्वत वक्फ घोषित करने की शक्ति सरकारी संपत्तियों और निजी संपत्तियों के अतिक्रमण का सुरक्षित ठिकाना साबित हुई है.

वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी

सरकार ने 1332 पन्नों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे में कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर (ठीक 20,92,072.536) से अधिक की वृद्धि हुई है. हलफनामे में कहा गया है, “मुगल काल से ठीक पहले, आजादी पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारत में बनाए गए वक्फों की कुल संख्या 18,29,163.896 एकड़ थी.”

 

हलफनामे में कहा गया है कि ऐसे चौंकाने वाले उदाहरण हैं, जहां सरकारी भूमि या यहां तक ​​कि निजी भूमि को भी वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है. दोनों मामलों में, जाहिर है, वक्फ बनाने वाला व्यक्ति संपत्ति का मालिक नहीं हो सकता. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने जवाब में सरकार के आंकड़ों को भ्रामक और बेबुनियाद बताया .

औकाफ क्षेत्र में 116 फीसदी की बढ़ोतरी

सरकार ने कहा कि यह जानकर वाकई हैरानी होती है कि 2013 में लाए गए संशोधन के बाद औकाफ क्षेत्र में 116 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार ने जोर देकर कहा कि अगर 1913 में पहला कानून भी पहला रेगुलेट उपाय माना जाए तो 2013 तक यानी 100 सालों में वक्फ के पास 18 लाख एकड़ जमीन थी और अगर 1913 से पहले के दौर को भी गिना जाए तो यह संख्या और भी ज्यादा होगी.

हलफनामे में कहा गया है, “वक्फ बाय यूजर प्रावधान की भी हितधारकों द्वारा आलोचना की गई क्योंकि इससे सरकार की संपत्तियों पर गलत तरीके से वक्फ का दावा करने की अनुमति मिल गई. संयुक्त समिति द्वारा 05 सितंबर 2024 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 32 शहरों/केंद्र शासित प्रदेशों के 14 वक्फ बोर्डों में से 25 में से कुल 5975 सरकारी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है.”

केंद्र ने 17 अप्रैल को सु्प्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह 5 मई तक वक्फ बाय यूजर सहित वक्फ संपत्तियों को न तो अधिसूचित करेगा और न ही केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति करेगा.

Exit mobile version