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नैतिक जिम्मेदारी को नहीं बनाया जा सकता कानूनी दायित्व: बहू सास-ससुर के भरण-पोषण की जिम्मेदार नहीं – हाई कोर्ट

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नैतिक जिम्मेदारी को नहीं बनाया जा सकता कानूनी दायित्व: बहू सास-ससुर के भरण-पोषण की जिम्मेदार नहीं – हाई कोर्ट, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बहू अपने सास-ससुर के भरण-पोषण के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।

नैतिक जिम्मेदारी को नहीं बनाया जा सकता कानूनी दायित्व: बहू सास-ससुर के भरण-पोषण की जिम्मेदार नहीं – हाई कोर्ट

 क्या कहा कोर्ट ने?

कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125 (अब BNSS की धारा 144) के तहत  भरण-पोषण का अधिकार केवल उन्हीं लोगों तक सीमित है, जिनका उल्लेख कानून में स्पष्ट रूप से किया गया है, सास-ससुर इस दायरे में शामिल नहीं हैं

जस्टिस का क्या कहना रहा?

जस्टिस मदन पाल सिंह ने कहा: भरण-पोषण का अधिकार वैधानिक (statutory) है, सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी होने से कोई व्यक्ति कानूनी रूप से बाध्य नहीं हो जाता

मामला क्या था?

एक बुजुर्ग दंपति ने अपनी बहू से भरण-पोषण की मांग की थीउन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थीदंपति का कहना था कि वे अपने बेटे पर निर्भर थे और अब असहाय हैं

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

कानून में बहू पर ऐसा कोई कानूनी दायित्व तय नहीं है बहू की नौकरी अनुकंपा (compassionate grounds) पर मिली हो, इसका कोई सबूत नहीं मिला, मृत बेटे की संपत्ति से जुड़े मुद्दे इस तरह की कार्यवाही में शामिल नहीं किए जा सकते

 फैसले का महत्व

यह फैसला साफ करता है कि नैतिक जिम्मेदारी ≠ कानूनी जिम्मेदारी भरण-पोषण कानून का दायरा सीमित है और उसे मनमाने तरीके से बढ़ाया नहीं जा सकता

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