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तो सूना हो जाएगा कचहरी चौराहा, चाय पान को तरस जाएंगे यहां के कारोबारी, शासकीय कार्यालय शहर के बाहर जाने के बाद नगर निगम प्रशासन फुटपाथी कारोबारियों को भी यहां से बेदखल करने पर आमदा

कटनी(YASH BHARAT.COM)। शहर के कचहरी चौक की कभी बेहद व्यस्त चौराहों में गिनती होती थी। जिसका कारण था, इस चौराहे पर जिला न्यायालय, कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार सहित दूसरे प्रशासनिक कार्यालयों का होना। लेकिन कटनी जैसे ही जिला बना तो उसके बाद इस चौराहे की रौनक धीरे-धीरे गायब होती चली गई। पहले यहां से कलेक्ट्रेट कार्यालय गया और फिर उसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय व जिला न्यायालय भी यहां से चला गया। इन प्रमुख शासकीय कार्यालयों के जाने के बाद चौराहे में चहल-पहल बेहद कम हो गई। थोड़ा बहुत चहल-पहल एसडीएम व तहसीलदार कार्यालय के कारण बची हुई थी लेकिन बीते दिनों एसडीएम व तहसीलदार कार्यालय भी यहां से बाहर शिफ्ट हो गए। जिसके बाद तो यह चौराहा पूरी तरह से सूना हो गया और अब यहां सिर्फ फुटपाथी कारोबारियों की वजह से चलह-पहल रहती है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन अपनी हठधर्मिता पर उतारू है और यहां से फुटपाथी कारोबारियों को भी अतिक्रमण के नाम पर हटाने पर अड़ा हुआ है जबकि यहां के कारोबारियों का कहना है कि यदि इन्हे भी हटा दिया गया तो यह चौराहा पूरी तरत से सूना हो जाएगा और हम चाय पान तक को तरस जाएंगे। ऐसा भी नहीं कि ये फुटपाथी कारोबारी कारोबार करने के नाम पर अति करते हों बकायदा सडक़ किनारे सफेद लाइन के अंदर अपना ठेला टपरा रखकर यहां फिर सफेद लाइन के अंदर जमीन पर बैठकर कारोबार कर अपने व अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। चूंकि जब सभी शासकीय कार्यालय यहां से चले गए तो यहां जाम की स्थिति भी कम ही निर्मित होती है तथा यहां वाहनोंं का दबाव केवल सेंटपॉल स्कूल लगते समय और छूटते समय रहता है। इसके अलावा पूरे समय चौराहा खाली व सूनसान रहता है। इसलिए नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि वो यहां कारोबार करने वाले फुटपाथी कारोबारियोंं को बिल्कुल नियम के तहत सफेद लाइन के अंदर कारोबार करने की अनुमति शर्तों के आधार पर दे। जिससे कचहरी चौराहे की रौनक थोड़ा बहुत बची रहे और मध्यम वर्गीय व गरीब तबके के कारोबारियों की रोजी रोटी भी चलती रहे।

फुटपाथी कपड़ा व्यापारियों का एक पखवाड़े से बंद है कारोबार

गौरतलब है कि कभी कोतवाली की बाउंड्री वाल से सटकर सडक़ किनारे फुटपाथ पर कपड़ा कारोबार करने वाले व्यापारियों को नगर निगम प्रशासन के द्धारा जिला न्यायालय बाहर जाने के बाद जिला न्यायालय की बाउंड्री वाल के किनारे जगह दी थी। तभी से यहां मध्यम वर्गीय कपड़ा कारोबारी अपना व्यापार करते हुए अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं लेकिन पिछले दिनों नगर निगम प्रशासन के द्धारा जारी किए गए एक तुगलकी फरमान से इनका कारोबार बंद हैं और इन कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकंट खड़ा हुआ। और तो और नगर निगम के द्धारा यह तुगलकी फरमान ऐसे समय में दिया गया जब शादी विवाह का सीजन चल रहा था और इसी सीजन में कपड़ा कारोबार थोड़ा बहुत जोर पकड़ता है। नगर निगम प्रशासन के द्धारा इन्हे चौपाटी में कारोबार करने कहा जा रहा है। ऐसा भी नहीं कि समय-समय पर ये मध्यम वर्गीय कारोबारी नगर निगम प्रशासन की बात नहीं मानते। जब भी इस चौराहे के पास स्थित कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तो ये कारोबारी नगर निगम प्रशासन के आदेश पर अपना कारोबार तक बंद कर लेते हैं। इसलिए इन्हे यहां से हटाना मतलब कचहरी चौराहे की रौनक को पूरी तरह से गायब करना होगा।

कारोबार की जगह खड़ी होने लगी कार

नगर निगम प्रशासन के तुगलकी फरमान के बाद एक बात और देखने को मिली जहां मध्यम वर्गीय कपड़ा कारोबारी अपना व्यापार कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे, वहां अमीरों की लग्जरी कारे खड़ी होने लगी। जिन्हे रोकने टोकने की हिम्मत नगर निगम प्रशासन में नहीं है। वैसे भी इस चौराहे पर स्थापित वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई की प्रतिमा के चारों तरफ दिन भर अमीरों की कारें पार्क रहती हैं और इन कार के मालिकों का न तो नगर निगम प्रशासन कुछ कर सकता है और न ही पुलिस विभाग कार्रवाई की हिम्मत जुटा पाता है क्योंकि यहां पार्क होने वाली कारें शहर के जनप्रतिनिधियों, नेताओं व अधिवक्ताओं की होती हैं।

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