Teeth Pain : हल्के में न लें दांत का दर्द, सिर तक फैला संक्रमण मार रहा लकवा

जबलपुरTeeth Pain। समय के साथ ब्लैक फंगस के घातक परिणाम सामने आने लगे हैं। घातक संक्रमण दिमाग तक पहुंचकर लकवा की वजह बन रहा है। अनेक मरीज लकवा की चपेट में आ चुके हैं।
इधर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती रहकर उपचार कराने वाले 116 मरीजों ने ब्लैक फंगस को हरा दिया। सभी स्वस्थ होकर घर लौटे। वहीं 90 मरीज अब भी भर्ती रहकर उपचार करवा रहे हैं।
137 मरीजों का नोजल एंडोस्कोपी से ऑपरेशन किया जा चुका है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. प्रदीप कसार का कहना है कि ब्लैक फंगस से बचाव का सबसे आसान उपाय है कि नागरिक कोरोना के संक्रमण से बचें। डायबिटीज से पीडि़त लोग शुगर को नियंत्रण में रखें।
दो दिन तक चलाया 350 इंजेक्शन: ब्लैक फंगस के उपचार में उपयोगी एम्फोटेरेसिन इंजेक्शन व अन्य दवाओं की उपलब्ध मेडिकल में सुिनिश्चित की जा रही है।
शनिवार को 350 इंजेक्शन नाक कान गला रोग विभाग को मिले थे। इंजेक्शन की खेप रविवार रात खत्म हो गई। चिकित्सकों ने संभावना जताई की सोमवार सुबह मरीजों को इंजेक्शन मिल जाएंगे।
इधर, मेडिकल में सस्ते व महंगे इंजेक्शन को लेकर मरीजों में असंतोष बढ़ रहा है। किडनी पर असर डालने के कारण सस्ते इंजेक्शन लगवाने से मरीज परहेज कर रहे हैं।
दांत के मरीज भी नाक कान गला विभाग में: ब्लैक फंगस के कारण दांतों में होने वाली तकलीफ के इलाज की जिम्मेदारी मेडिकल के नाक कान गला रोग विभाग के चिकित्सकों पर आ गई है। पहले से ही इस विभाग में चिकित्सक समेत अन्य अमले की कमी बनी हुई है। जो ब्लैक फंगस मरीजों के उपचार में बाधा बन रही है। हालांकि विभागाध्यक्ष डॉ. कविता सचदेवा का कहना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद कामकाज पर असर नहीं पड़ा है।
कई मरीज दो माह से भर्ती: ब्लैक फंगस का बेहतर उपचार संभव होने के बावजूद मरीज कराह रहे हैं। इसकी वजह कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना बताया जा रहा है। मेडिकल व अन्य निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस के तमाम मरीज दो माह से ज्यादा समय से भर्ती हैं। एक बार उपचार करवाकर घर लौटे कुछ मरीजों काे दोबारा भर्ती होना पड़ा। वे घर पर पड़े-पड़े दोबारा ब्लैक फंगस की चपेट में आ गए।








