TCS Nasik News: नासिक TCS दफ्तर में यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण केस में बड़ा खुलासा, AIMIM पार्षद समेत 4 के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट
TCS Nasik News: नासिक TCS दफ्तर में यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण केस में बड़ा खुलासा, AIMIM पार्षद समेत 4 के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट
नासिक (महाराष्ट्र): सॉफ्टवेयर क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक इकाई में कथित यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्मांतरण (Forced Conversion) के मामले में पुलिस ने अपनी पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई पूरी कर ली है। नासिक पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने शुक्रवार को इस खौफनाक सिंडिकेट के खिलाफ सत्र न्यायालय (Session Court) के समक्ष 1,500 पन्नों का पहला आरोपपत्र दाखिल किया। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद टीसीएस प्रबंधन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी कर्मचारियों को नौकरी से सस्पेंड कर दिया है।
इन 4 मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, AIMIM पार्षद भी शामिल
पुलिस की एसआईटी ने देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज मुख्य मामले में जिन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में दस्तावेज सौंपे हैं, उनके नाम निम्नलिखित हैं:
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दानिश एजाज शेख (मुख्य आरोपी)
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तौसीफ बिलाल अत्तार
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निदा एजाज खान
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मतीन मजीद पटेल (AIMIM पार्षद)
फरार आरोपी को दी थी पनाह: पुलिस ने इस पूरे नेक्सस में अब तक कुल 9 एफआईआर (FIR) दर्ज कर 8 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा है। एआईएमआईएम (AIMIM) के पार्षद मतीन पटेल पर आरोप है कि जब मुख्य महिला आरोपी निदा खान पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रही थी, तब उन्होंने उसे छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्थित अपने घर में छुपा कर रखा था।
बीएनएस और एससी/एसटी एक्ट की इन संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज
आरोपियों के खिलाफ केवल उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की धाराएं लगाई गई हैं:
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं: 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र), 64 (बलात्कार), 68 (अधिकार प्राप्त व्यक्ति द्वारा यौन संबंध), 69 (धोखाधड़ी के साधनों का प्रयोग करके यौन संबंध), 46 (उकसाना), 75 (यौन उत्पीड़न), 318(4) (धोखाधड़ी), 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और 249 (अपराधी को शरण देना)।
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एट्रोसिटी एक्ट: पीड़िता के समाज से जुड़े होने के कारण मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कड़े प्रावधान भी जोड़े गए हैं।
व्हाट्सएप चैट और जब्त ईमेल बने सबसे बड़े डिजिटल सबूत
पुलिस ने अदालत के सामने जो 1,500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, उसमें आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पुख्ता वैज्ञानिक और डिजिटल सबूत शामिल किए गए हैं:
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बयान और मेडिकल टेस्ट: BNSS की धारा 183 के तहत प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने 17 गवाहों के गोपनीय बयान दर्ज कराए गए हैं। साथ ही पीड़िता और आरोपियों की मेडिकल जांच रिपोर्ट शामिल है।
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डिजिटल एविडेंस: पीड़िता और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट, ईमेल ट्रेल्स और मोबाइल फोन के डेटा को फोरेंसिक लैब से प्रमाणित कराकर अटैच किया गया है।
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धर्मांतरण के दस्तावेज: पुलिस ने आरोपियों के पास से वे मूल दस्तावेज (Original Documents) भी बरामद कर लिए हैं, जिनका इस्तेमाल वे पीड़िता का नाम और धर्म बदलने के लिए करने वाले थे। इसके अलावा बैंक स्टेटमेंट, घटनास्थल का पंचनामा और आर्थिक धोखाधड़ी के सबूत भी कोर्ट को सौंपे गए हैं।
Zero Tolerance… – टीसीएस कंपनी ने जारी किया कड़ा बयान
इस घिनौने मामले में अपनी कंपनी के कर्मचारियों का नाम आने के बाद टीसीएस (TCS) प्रबंधन ने तुरंत आंतरिक जांच बैठाई और सख्त रुख अख्तियार किया। कंपनी के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा:
“टीसीएस कार्यस्थल पर किसी भी रूप में उत्पीड़न, जबरदस्ती या भेदभाव के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं (Zero Tolerance Policy) की नीति अपनाती है। जैसे ही यह मामला हमारे संज्ञान में आया, नासिक कार्यालय में इस कथित कृत्य में शामिल पाए गए सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। हम जांच में पुलिस का पूरा सहयोग कर रहे हैं।”
अभी थमी नहीं है जांच; आएगा पूरक आरोपपत्र
सरकारी वकीलों के मुताबिक, हालांकि मुख्य साक्ष्यों के आधार पर पहली चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, लेकिन पुलिस की तफ्तीश अभी भी जारी रहेगी। एसआईटी अतिरिक्त सबूत जुटाकर BNSS की धारा 193(9) के तहत कोर्ट में एक ‘Supplementary Charge Sheet’ (पूरक आरोपपत्र) भी पेश करेगी।
इसके अलावा, मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज अन्य 8 मामलों की जांच भी अंतिम चरण में है और तय समयसीमा के भीतर वहां भी चार्जशीट दाखिल की जाएगी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं (Bail Pleas) पहले ही खारिज कर दी हैं।

