2007 के हिंसक विवाद के बाद पहली बार बंगाल पहुंचीं तसलीमा; जानिए क्यों छोड़ना पड़ा था शह

19 साल लंबे निर्वासन के बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन; कहा- "अपने घर लौटने जैसा अनुभव"

2007 के हिंसक विवाद के बाद पहली बार बंगाल पहुंचीं तसलीमा; जानिए क्यों छोड़ना पड़ा था शह

कोलकाता: बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन करीब 19 साल के लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को कोलकाता लौट आईं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर समर्थकों और प्रशंसकों का हाथ जोड़कर अभिवादन करते हुए उन्होंने इस यात्रा को अपनी ‘भावनात्मक घरवापसी’ करार दिया।

तसलीमा नसरीन रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले एक कट्टरपंथ-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगी, जिसे राज्य की राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है।

“कट्टरपंथी देश को बर्बाद कर रहे हैं, मुझे ढाका की याद आती है”

कोलकाता पहुँचने पर मीडिया से बातचीत करते हुए तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर अपनी बेबाक राय रखी:

2007 में क्यों छोड़ना पड़ा था कोलकाता?

यह नवंबर 2007 के बाद तसलीमा नसरीन की कोलकाता की पहली यात्रा है:

  1. ‘द्विखंडितो’ और ‘लज्जा’ का विवाद: अपने चर्चित उपन्यास ‘लज्जा’ (1994) के बाद जान से मारने की धमकियां मिलने पर उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। बाद में 2004 में वह कोलकाता में बस गईं।

  2. 2007 के हिंसक प्रदर्शन: वर्ष 2003 में उनकी आत्मकथा ‘द्विखंडितो’ पर तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने प्रतिबंध लगाया था। नवंबर 2007 में इसके विरोध में कोलकाता में हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसके बाद शांति बनाए रखने के लिए सेना तैनात करनी पड़ी।

  3. शहर छोड़ने का दबाव: तत्कालीन बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार ने उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देकर शहर छोड़ने के लिए कहा था। इसके बाद उन्हें जयपुर, दिल्ली और फिर विदेश जाना पड़ा।

साहित्यिक कार्यक्रम और राजनीतिक गहमागहमी

रवींद्र सदन में होने वाले इस साहित्यिक कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और जाने-माने लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय समेत कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है।

यह आयोजन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लगभग दो दशकों तक लेखकों, नागरिक समाज और राजनीतिक स्तर पर (जैसे बीजेपी सांसद समिक भट्टाचार्य द्वारा संसद में उठाई गई मांग) किए गए प्रयासों के बाद तसलीमा की यह वापसी संभव हो सकी है।

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