कटनी जिला जेल में जजों का औचक निरीक्षण: बैरकों की सफाई और खाने की गुणवत्ता जांची; बोले- बिना वकील वाले बंदियों को तुरंत दें सरकारी वकील
कटनी (27 जून)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कटनी के अध्यक्ष व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जितेन्द्र कुमार शर्मा तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) श्री जे.पी. चिडार द्वारा शनिवार को जिला जेल कटनी का औचक निरीक्षण किया गया। इस औचक कार्रवाई के दौरान माननीय न्यायाधीशों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के मानवाधिकारों की स्थिति, बैरकों की स्वच्छता और कैदियों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था का गहनता से जायजा लिया।
बैरकों का भ्रमण और साफ-सफाई के निर्देश
निरीक्षण के दौरान न्यायाधीशों ने पुरुष और महिला दोनों बैरकों का खुद घूमकर मुआयना किया। उन्होंने वहां की साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश (रोशनी) व्यवस्था और वेंटिलेशन की स्थिति को देखा। जेल प्रशासन को सख्त लहजे में निर्देश दिए गए कि बैरकों में स्वच्छता के उच्च मानकों का पालन किया जाए और पर्याप्त हवा व रोशनी की उपलब्धता हमेशा सुनिश्चित रहे।
रसोई में जाकर चेक किया भोजन, दिए पौष्टिक खाने के निर्देश
कैदियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीशों ने जेल की मुख्य रसोई (किचन) का भी निरीक्षण किया। वहां बंदियों के लिए तैयार हो रहे भोजन की गुणवत्ता (Quality) की जांच की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि शासन के नियमानुसार हर हाल में बंदियों को स्वच्छ, पौष्टिक और समय पर भोजन परोसा जाए।
कैदियों से सीधा संवाद: विधिक सहायता की ली जानकारी > निरीक्षण की सबसे खास बात यह रही कि जजों ने बैरकों में बंदियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कैदियों से पूछा कि उन्हें नियमानुसार कानूनी मदद (लीगल ऐड) मिल रही है या नहीं। इस दौरान जिन बंदियों के पास अपनी पैरवी के लिए निजी अधिवक्ता उपलब्ध नहीं थे, उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से तत्काल शासकीय वकील उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए गए।
अस्पताल का निरीक्षण और मौसमी बीमारियों से बचाव
जेल परिसर के भीतर स्थित अस्पताल का भी निरीक्षण किया गया, जहां बीमार बंदियों के इलाज और दवाओं के स्टॉक की उपलब्धता की जानकारी ली गई। वर्तमान मौसम को देखते हुए जेल चिकित्सक को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतने और जरूरी दवाइयां एडवांस में रखने को कहा गया।
मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योग और कौशल विकास पर जोर
निरीक्षण के अंत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जितेन्द्र कुमार शर्मा ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि बंदियों के व्यवहार में सुधार और उनके पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए जेल के भीतर योग, कौशल विकास (Skill Development) और शिक्षा जैसी रचनात्मक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि रिहाई के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
इस महत्वपूर्ण औचक निरीक्षण के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं व्यवहार न्यायाधीश श्रीमती मृणालिनी सिंह, जेल अधीक्षक सहित जेल का अन्य स्टाफ मुस्तैद रहा।
