मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद्द

मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद्द

मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद्द

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने सूचना के अधिकार (Right to Information) कानून की गरिमा को बहाल रखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस विवादास्पद अधिसूचना (Notification) को पूरी तरह से रद (Cancel) कर दिया है, जिसके तहत लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को आरटीआई (RTI) कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया था।

चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली किसी भी मुख्य एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून की मूल भावना के खिलाफ है।

‘खुफिया या सुरक्षा संगठन’ नहीं है लोकायुक्त SPE: सर्वोच्च अदालत

मामले की गहन सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के उन सभी तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें लोकायुक्त की इस शाखा को आरटीआई के नियमों से अलग रखने की वकालत की गई थी।

अब आम जनता के सामने आएंगे भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे

राज्य सरकार के इस पुराने आदेश के रद होने के बाद अब मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस (SPE) द्वारा की जा रही जांचों, बंद की गई फाइलों (Closer Reports) और नेताओं-अफसरों के खिलाफ लंबित भ्रष्टाचार के मामलों की कुंडली आम जनता आरटीआई के जरिए निकाल सकेगी।

कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और लोकायुक्त की जांचों में भी और अधिक कसावट आएगी। इस फैसले के बाद वल्लभ भवन (मंत्रालय) से लेकर लोकायुक्त मुख्यालय तक कानूनी हलचल तेज हो गई है।

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