मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद्द
मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद्द
मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद्द
मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद्द
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने सूचना के अधिकार (Right to Information) कानून की गरिमा को बहाल रखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस विवादास्पद अधिसूचना (Notification) को पूरी तरह से रद (Cancel) कर दिया है, जिसके तहत लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को आरटीआई (RTI) कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया था।
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली किसी भी मुख्य एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून की मूल भावना के खिलाफ है।
‘खुफिया या सुरक्षा संगठन’ नहीं है लोकायुक्त SPE: सर्वोच्च अदालत
मामले की गहन सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के उन सभी तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें लोकायुक्त की इस शाखा को आरटीआई के नियमों से अलग रखने की वकालत की गई थी।
जांच का दायरा है अलग: सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत दर्ज सरकारी भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करती है।
नहीं मिलेगी धारा 24(4) की आड़: अदालत ने साफ किया कि इस विशिष्ट कार्यप्रणाली के कारण लोकायुक्त की इस विंग को आरटीआई अधिनियम की धारा 24(4) के अंतर्गत आने वाले ‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ (Intelligence and Security Organization) की श्रेणी में कतई नहीं रखा जा सकता। सुरक्षा एजेंसियों को मिलने वाली छूट भ्रष्टाचार जांच दल पर लागू नहीं होती। मध्य प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका; लोकायुक्त SPE को RTI के दायरे से बाहर रखने का सरकारी आदेश रद
अब आम जनता के सामने आएंगे भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे
राज्य सरकार के इस पुराने आदेश के रद होने के बाद अब मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस (SPE) द्वारा की जा रही जांचों, बंद की गई फाइलों (Closer Reports) और नेताओं-अफसरों के खिलाफ लंबित भ्रष्टाचार के मामलों की कुंडली आम जनता आरटीआई के जरिए निकाल सकेगी।
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और लोकायुक्त की जांचों में भी और अधिक कसावट आएगी। इस फैसले के बाद वल्लभ भवन (मंत्रालय) से लेकर लोकायुक्त मुख्यालय तक कानूनी हलचल तेज हो गई है।