श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बडे़ मंदिर में बड़ी धूमधाम एवं श्रद्धा भक्ति से मनाया गया श्रुतपंचमी महोत्सव, शहर में निकली मॉ जिनवाणी की विशाल शोभायात्रा

कटनी। परम पूज्य आचार्य विद्यासागर महाराज एवं नवाचार समय सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक मुनि प्रसाद सागर महाराज एवं मुनि संघ के पावन सानिध्य में श्री 1008 पार्श्वनाथ दिग. जैन बडे़ मंदिर में श्रुतपंचमी महोत्सव बड़ी धूमधाम एवं श्रद्धा भक्ति से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः अभिषेक, जिनवाणी पूजन एवं जिनवाणी सरस्वती अनावरण एवं मुनि संघ के मांगलिक प्रवचन के पश्चात् मॉ जिनवाणी की विशाल शोभायात्रा महावीर कीर्ति स्तंभ से प्रारंभ होकर घंटाघर, गर्गचौराहा, नईबस्ती, भगवती चौराहा, हीरागंज, गोलबाजार, मेन रोड़ सुभाष चौक, कपड़ा बाजार से होते हुये बड़े मंदिर जी में समाप्त हुई। जगह-जगह रांगोली सजाकर,आरती उतारकर मुनिसंघ का पादप्रक्ष्लन कर आगवानी की गई। इस अवसर पर मुनि ने चर्चा करते हुये बतलाया कि श्रुत पंचमी जैन समाज का महापर्व है। आज से लगभग 2 वर्ष पूर्व वीर निर्वाण सम्वंत 614 में आचार्य धरसेन जो कि गिरनार पर्वत की चन्द्र गुफा मेंं रहते थे। उन्होने ने श्रुत की रक्षार्थ पुष्पदत्त एवं भूतवली नामक विशेष ज्ञान के धारक युवा मुनिराजों को बुलाया तथा उनके माध्यम से षट खंडागम शास्त्र की रचना पूर्ण की। मुनिश्री ने आगे कहा कि इस दिन से श्रुत पंरम्परा को लिपिबद्ध परंपरा के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसलिए यह दिवस श्रुत पंचमी के नाम से जाना जाता है। यात्रा में पंचायत अध्यक्ष संजय जैन, विन्नी जैन, अजीत सिंघई शरद सरावगी, राहुल जैन, मनीष जैन, अरविन्द्र जैन, लम्पू जैन, सोनू जैन, पंचम जैन के साथ दिग. जैन पंचायत महासभा अखिल भारतवर्षीय दिग.जैन महिला परिषद्, श्री 1008 शांतिसागर रात्रि कालीन पाठशाल, गुरूभक्ति मण्डल, जैन सोशल गु्रप के पदाधिकारी एवं सम्मनित सदस्य शामिल हुए।








