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Sexual harassment will be considered even without skin-to-skin contact: स्किन-टू-स्किन कान्टैक्ट के बिना भी माना जाएगा यौन उत्पीड़न, सुप्रीम कोर्ट ने रद किया बाम्बे हाईकोर्ट का फैसला

Sexual harassment will be considered even without skin-to-skin contact सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बाम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अगर किसी आरोपी और पीड़िता के बीच सीधे स्किन टू स्किन कान्टैक्ट नहीं होता है तो पाक्सो अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न का कोई अपराध नहीं बनता है।

नई दिल्ली, एजेंसी। यौन उत्‍पीड़न से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। स्किन-टू-स्किन कान्टैक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बाम्बे हाई कोर्ट के फैसले को रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कानून का उद्देश्य अपराधी को कानून के जाल से बचने की अनुमति देना नहीं हो सकता है। शीर्ष अदालत, अटार्नी जनरल और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई कर रही थी।

इससे पहले बाम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा गया था कि स्किन टू स्किन कान्टैक्ट के बिना नाबालिग के निजी अंगों को टटोलना यौन उत्पीड़न के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस आधार पर दोषी को बरी कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब साफ कर दिया है कि पाक्सो एक्‍ट में फिजिकल कान्टैक्‍ट के मायने सिर्फ स्किन-टू-स्किन टच नहीं है। सत्र अदालत ने व्यक्ति को पाक्सो अधिनियम और आइपीसी की धारा 354 के तहत अपराधों के लिए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न का सबसे महत्वपूर्ण घटक यौन इरादा है, न कि बच्चे के साथ स्किन-टू-स्किन कान्टैक्ट। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब विधायिका ने इसपर स्पष्ट इरादा व्यक्त किया है, तो अदालतें प्रावधान में अस्पष्टता पैदा नहीं कर सकती हैं। अदालतें अस्पष्टता पैदा करने में अति उत्साही नहीं हो सकती हैं। इस बेंच में जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी भी शामिल थीं।

महाराष्ट्र सरकार ने बाम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को अपमानजनक करार दिया था और शीर्ष अदालत से इसे रद्द करने का आग्रह किया था। इस फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने तर्क दिया था कि सर्जिकल दस्ताने पहनने वाला व्यक्ति एक महिला के पूरे शरीर को टोटल कर सकता है और फिर वह किसी भी सजा से बच सकता है।

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