संतान सप्तमी 2026: 18 सितंबर को रखा जाएगा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सात अंक का विशेष महत्व
नई दिल्ली/कटनी। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ‘संतान सप्तमी’ का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। कई स्थानों पर इसे ‘ललिता सप्तमी’ या ‘मुक्ताभरण सप्तमी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह व्रत 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।
यह पर्व मुख्य रूप से संतानों की लंबी आयु, उनके उत्तम स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और रक्षा के लिए रखा जाता है। इसके अलावा, जो दंपति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। संतान सप्तमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विधान से पूजन किया जाता है।
संतान सप्तमी 2026: शुभ तिथि व मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल सप्तमी तिथि 17 सितंबर 2026 की सुबह 10:48 बजे से शुरू होकर 18 सितंबर 2026 को दोपहर 01:01 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर व्रत 18 सितंबर को ही रखा जाएगा।
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व्रत तिथि: 18 सितंबर 2026, शुक्रवार
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पूजा का शुभ मुहूर्त (अभिजित मुहूर्त): दोपहर 12:08 बजे से 12:57 बजे तक (कुल अवधि: 49 मिनट)
संतान डोरा (धागा) और 7 अंक का विशेष महत्व
संतान सप्तमी के पूजन में ‘सात (7)’ के अंक का विशेष और पवित्र महत्व होता है:
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संतान डोरा: सूती मौली या धागा लेकर उसमें सात गांठें बांधी जाती हैं और उसे हल्दी या केसर से रंगा जाता है। यह डोरा पूजा के समय भगवान शिव-पार्वती को अर्पित करने के बाद माताएं अपनी दाहिनी कलाई पर धारण करती हैं।
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सात पूए का भोग: इस व्रत में गेहूं के आटे और गुड़ से बने सात पूए (गुलगुले) भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
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दान व पारण: पूजा के बाद 7 पूए किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान में दिए जाते हैं तथा 7 पूए स्वयं खाकर व्रत का पारण किया जाता है।
पूजन सामग्री सूची
मौली (सूती धागा), हल्दी की गांठ या केसर (डोरा रंगने के लिए), रोली, चंदन पाउडर, अक्षत, गंगाजल, शुद्ध देसी घी, पंचमेवा, आरती थाली सेट और भोग के लिए पूए।
संतान सप्तमी पूजा विधि
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संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लें।
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चौकी स्थापना: एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर शिव-पार्वती (शिव परिवार) की प्रतिमा स्थापित करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
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डोरा अर्पण: सात गांठों वाला हल्दी से रंगा हुआ ‘संतान डोरा’ तैयार कर भगवान के समक्ष रखें।
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षोडशोपचार पूजन: रोली, चंदन, अक्षत, फूल और देसी घी का दीया जलाकर पूजन करें।
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भोग व कथा: शिव-पार्वती को 7 पूए और पंचमेवा का भोग लगाएं। इसके बाद संतान सप्तमी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
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आरती व पारण: आरती उतारने के बाद तैयार किया गया संतान डोरा अपनी कलाई पर बांध लें। 7 पूए किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दें और स्वयं 7 पूए खाकर व्रत का पारण करें।
(नोट: कई परिवारों में दोपहर की पूजा के बाद तो कई जगह शाम की आरती के बाद पारण किया जाता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।)
