
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल रुपये को RBI का यह कदम सहारा देगा, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं या विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही, तो रुपये पर दबाव फिर आ सकता है। मजबूत रुपया आम उपभोक्ताओं के लिए राहत देने वाला है, जबकि निर्यातकों के लिए यह चुनौती बन सकता है।
RBI के इस कदम ने नॉन-डिलीवेरेबल डेरिवेटिव (NDD) बाजार पर अंकुश लगाकर असली रुपये के मूल्य को स्थिर किया। वहीं, डॉलर के प्रभुत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ईरान ने तेल टोल भुगतान के लिए डॉलर के बजाय युआन में लेन-देन करने का संकेत दिया है।
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