Sunday, May 17, 2026
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निजी स्कूलों में RTE एडमिशन मुश्किल, एक लाख बच्चे रहेंगे बाहर

भोपाल। निजी स्कूलों में RTE एडमिशन मुश्किल, एक लाख बच्चे रहेंगे बाहर,मध्य प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए इस वर्ष भी भारी संख्या में आवेदन सामने आए हैं। राज्य के करीब 26 हजार निजी स्कूलों में उपलब्ध 1.22 लाख सीटों के लिए कुल 2.10 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। ऐसे में लगभग एक लाख बच्चों को इस बार भी मनचाहे स्कूल में प्रवेश नहीं मिल पाएगा।

निजी स्कूलों में RTE एडमिशन मुश्किल, एक लाख बच्चे रहेंगे बाहर

मंगलवार को आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया समाप्त हो गई। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कुल आवेदनों में से करीब 1.78 लाख का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 32 हजार आवेदन सत्यापन से बाहर रह गए हैं। इससे लॉटरी प्रक्रिया में शामिल होने वाले आवेदकों की संख्या सीमित रह जाएगी।

आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं, जहां उन्हें निशुल्क शिक्षा दी जाती है। बावजूद इसके, हर साल सीटों की सीमित संख्या और बढ़ती मांग के कारण प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है।

2 अप्रैल को होगी लॉटरी

स्कूल आवंटन के लिए 2 अप्रैल को लॉटरी निकाली जाएगी। इस वर्ष भी सीटों की तुलना में लगभग दोगुने आवेदन आने से बड़ी संख्या में बच्चों को निराशा हाथ लग सकती है।

शहरी क्षेत्रों में बढ़ा दबाव

बड़े शहरों में आरटीई के तहत प्रवेश की मांग अधिक देखी गई है।

भोपाल में 7359 सीटों के लिए 15527 आवेदन
इंदौर में लगभग 9000 सीटों पर 12886 आवेदन
ग्वालियर में 4787 सीटों के लिए 6110 आवेदन
जबलपुर में 3502 सीटों पर 6985 आवेदन

इसके विपरीत, कई छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों में आवेदन नहीं आने की स्थिति भी सामने आई है।

हर साल बढ़ रही है मांग

पिछले वर्षों के आंकड़े भी यही संकेत देते हैं कि आरटीई के तहत प्रवेश के लिए आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं।

सत्र 2024-25 में 1.48 लाख आवेदन
सत्र 2025-26 में 1.62 लाख आवेदन
सत्र 2026-27 में 2.10 लाख आवेदन

वहीं सीटों में उतनी वृद्धि नहीं हो पाई है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। आरटीई योजना की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार के सामने सीटों की संख्या बढ़ाने और संतुलित वितरण सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम