मध्यप्रदेश

Road Divlopment Corporation ने की 400 करोड़ रूपए का Laon लेने की तैयारी

भोपाल। प्रदेश में विकास के कामों को गति देने के लिए जरूरी धनराशि के इंतजाम के लिए बाजार से कर्ज लेने के अलावा दूसरे रास्तों पर काम भी शुरू हो गया है। सड़कों के कामों को पूरा करने के लिए अब मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि में आने वाली राशि के आधार पर कर्ज लिया जाएगा।

अगले दस साल तक राजमार्ग निधि में 60-60 करोड़ रुपए जमा होंगे। इस राशि के आधार पर सड़क विकास निगम 400 करोड़ रुपए लेने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए राजमार्ग निधि की कार्यकारी समिति ने अगले दस साल मिलने वाली राशि निगम को देने और उसके द्वारा कर्ज लेने का फैसला किया है। इस आधार पर लोक निर्माण विभाग कैबिनेट में प्रस्ताव लाने जा रहा है।

प्रदेश के आर्थिक हालात इन दिनों बहुत अच्छे नहीं हैं। वेज एंड मींस यानी वेतन-भत्तों में खर्च होने लायक रकम ही सरकार के पास है। उधर, चुनाव साल में विकास से जुड़ी जो घोषणाएं हैं, उन्हें पूरा करने का दबाव है। इसके मद्देनजर सरकार हर उस संभावना को खंगाल रही है, जहां से कुछ राशि हासिल हो सकती है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सभी विभागों से कहा है कि वे वैकल्पिक आय के स्त्रोत तलाशने पर काम करें। यही वजह है कि लोक निर्माण विभाग ने जब नजर दौड़ाई तो उसे राजमार्ग निधि से उम्मीद की किरण नजर आई।

विभाग को जब यह पता लगा कि अगले दस साल तक निधि में हर साल 60 करोड़ रुपए जमा होते रहेंगे तो इस आधार पर दस साल में जमा होने वाले 600 करोड़ रुपए के आधार पर 400 करोड़ रुपए का कर्ज लेने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया।

निधि को संचालित करने वाली समिति ने भी इसे हरी झंडी दे दी। अब विभाग नीतिगत मामला होने की वजह से प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए कैबिनेट में ले जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सड़क विकास निगम को कर्ज लेने के लिए सरकार अपनी गारंटी भी देगी।

हजारों करोड़ की सड़क के लिए चंद हजार का बजट

उधर, सरकार ने चुनावी साल को देखते हुए बजट और पहले अनुपूरक बजट में सैकड़ों सड़क, पुल व पुलिया बनाने की घोषणा की है। इनके लिए बजट में कुछ हजार रुपए ही प्रतिकात्मक रूप में रखे गए हैं। विभाग को मालूम है कि ये सड़कें चुनाव होने से पहले किसी सूरत में नहीं बन सकती हैं पर टेंडर निकालकर भूमिपूजन कराने की रणनीति बनार्ई गई है ताकि लोगों को ये भरोसा हो जाए कि आज नहीं तो कल ये सड़कें जरूर बनेंगी।

Leave a Reply

Back to top button