इमरान खान की रिहाई के लिए पाकिस्तान में फिर संग्राम: इस्लामाबाद की घेराबंदी और शाहबाज़-मुनीर सरकार की बढ़ी हलचल

इमरान खान की रिहाई के लिए पाकिस्तान में फिर संग्राम: इस्लामाबाद की घेराबंदी और शाहबाज़-मुनीर सरकार की बढ़ी हलचल
इस्लामाबाद / पेशावर:पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की जेल से रिहाई और निजी डॉक्टर से इलाज की मांग को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति गरमा गई है। केंद्र में शाहबाज़ शरीफ सरकार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ बातचीत के दो दौर बेनतीजा खत्म होने के बाद PTI समर्थकों ने खैबर पख्तूनख्वा (KPK) से राजधानी इस्लामाबाद की ओर बड़े पैमाने पर ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू कर दिया है।
तनाव की 5 बड़ी वजहें और वर्तमान स्थिति:
2000 से अधिक कार्यकर्ता गिरफ्तार, इस्लामाबाद में धारा 144:
शाहबाज़ सरकार ने लॉन्ग मार्च रोकने के लिए पंजाब और संघीय राजधानी क्षेत्र में व्यापक क्रैकडाउन चलाया है। PTI का दावा है कि उसके 2,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। पूरे इस्लामाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है।
संसद, रेड ज़ोन और हाईवे सील:
इस्लामाबाद जाने वाले मुख्य राजमार्गों, मोटरावे और संसद भवन की ओर जाने वाले रास्तों को भारी-भरकम शिपिंग कंटेनर लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों (फ्रंटियर कोर) की तैनाती की गई है।
रास्ते में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प:
लक्की मारवत के पास फ्रंटियर फोर्स और प्रदर्शनकारियों के बीच पथराव और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, झड़पों के बावजूद मार्च आगे बढ़ता जा रहा है।
वार्ता क्यों विफल हुई?
शाहबाज़ सरकार के प्रतिनिधिमंडलों और PTI नेताओं के बीच शनिवार देर रात तक दूसरे दौर की बैठक चली। गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा सरकार द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग न देने और सुरक्षा चिंताओं के कारण सहमति नहीं बन सकी।
इमरान खान की सेहत को लेकर चिंता:
अडियाला जेल में बंद 73 वर्षीय इमरान खान की आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल में जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि, निजी डॉक्टर से जांच की इजाजत न मिलने और सरकार की पुनर्विचार याचिका के बाद समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा।
मार्च का चरणबद्ध शेड्यूल (Route & Halts):
4 अक्टूबर: लक्की मारवत (गांडी चौक) से लॉन्ग मार्च की शुरुआत; रात का ठहराव करक के पास।
5 अक्टूबर: दोपहर करक से रवानगी; रात का ठहराव कोहाट के पास।
6 अक्टूबर: कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकजई के प्रदर्शनकारी शामिल होंगे; मत्तानी में रात्रि विश्राम।
7 अक्टूबर: पेशावर के बुध बैर और कोहाट रोड ब्रिज से नए जत्थे जुटेंगे; चरसद्दा इंटरचेंज पर ठहराव।
8 अक्टूबर: चरसद्दा और मोहमंद के समर्थक जुड़ेंगे; सभी प्रदर्शनकारी खैरआबाद पहुँचेंगे जहाँ से अगले चरण की रणनीति घोषित की जाएगी।
बड़ा सवाल: क्या इस्लामाबाद पहुँच पाएगा यह मार्च?
सरकार का रुख: प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह और गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि किसी भी सूरत में प्रदर्शनकारियों को रेड ज़ोन या इस्लामाबाद में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
रणनीतिक चुनौती: मार्च को कई दिनों के पड़ाव में बांटा गया है ताकि अन्य जिलों से जनसमर्थन जुटाया जा सके। यदि 8 अक्टूबर को खैरआबाद सीमा पर भारी भीड़ जमा होती है और पंजाब से भी जनसमर्थन मिलता है, तो सेना प्रमुख आसिम मुनीर और शहबाज़ सरकार के लिए इसे बिना बल प्रयोग रोके रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।







