बस्तर/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचकर सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीवाली मनाई। कभी नक्सलवाद का सबसे अभेद्य किला माने जाने वाले बस्तर में जवानों के बीच पहुंचकर उन्होंने उनके अदम्य साहस, निष्ठा और सर्वोच्च बलिदान की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि जवानों के त्याग और समर्पण की बदौलत ही आज क्षेत्र से नक्सल आतंक का पूरी तरह अंत हो सका है। नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के बाद इस क्षेत्र में यह शांति और भयमुक्त माहौल वाली पहली ऐतिहासिक दीवाली है।
- दशकों का लाल आतंक समाप्त: अब देश का हर जिला नक्सल मुक्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2026 की दीपावली को ऐतिहासिक बताते हुए देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दशकों से चले आ रहे माओवादी आतंक के खिलाफ देश को पहली बार निर्णायक सफलता मिली है।
- नक्सल मुक्त भारत का संकल्प सिद्ध: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आज देश का एक भी जिला नक्सलवाद की चपेट में नहीं है। देश अब पूरी तरह नक्सल मुक्त भारत बन चुका है।
- मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति: पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कभी इस गंभीर समस्या को असाध्य मानकर हालात के भरोसे छोड़ दिया गया था, लेकिन वर्ष 2014 के बाद सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति ने पूरी तस्वीर बदल दी।
- 47 वर्षों में पहली बार: सीआरपीएफ का एक भी जवान नहीं हुआ शहीद
प्रधानमंत्री ने सुरक्षाबलों की उपलब्धि को रेखांकित करते हुए बताया कि बीते 47 वर्षों में यह पहला मौका है जब पूरे एक साल के दौरान ड्यूटी पर तैनात सीआरपीएफ (CRPF) का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ।
“वर्ष 2004 से 2013 के दौर में हालात ऐसे थे कि मारे जाने वाले नक्सलियों से कहीं अधिक संख्या हमारे जवानों की शहादत की होती थी। लेकिन आज हमारी नीतियों, संकल्प और जवानों की बहादुरी का ही परिणाम है कि हमने नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल कर लिया है।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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पुराने दिनों का जिक्र करते हुए पीएम ने 2010 की दंतेवाड़ा घटना को याद किया, जब नक्सलियों से लड़ते हुए 76 जवान शहीद हुए थे और 44 नागरिकों की जान गई थी। माओवादियों ने दहशत के बल पर आम जनता से मतदान तक का अधिकार छीन लिया था।
- बस्तर में अब शांति और विकास का नया दौर
छत्तीसगढ़ के करनपुर में जवानों से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जिस इलाके ने दशकों तक लाल आतंक का दंश झेला, वह अब शांति, प्रगति और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- नेटवर्क का सफाया: बस्तर लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद विरोधी अभियानों का केंद्र रहा है, जहां सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सली नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका।
सफलता के मुख्य कारण: सीआरपीएफ के महानिदेशक जी. पी. सिंह ने इस ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण, अचूक रणनीति और घायल जवानों को मिली त्वरित चिकित्सा सहायता को दिया।
- सरहद पर दीवाली की 12 साल पुरानी परंपरा
वर्ष 2014 में ‘प्रधानसेवक’ के रूप में देश की कमान संभालने के बाद से ही पीएम मोदी हर दीवाली सीमा या दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों के साथ मनाते आए हैं:
| वर्ष | स्थान / क्षेत्र |
|—|—|
| 2014 | सियाचिन |
| 2015 | डोगराई (पंजाब सीमा) |
| 2016 | सुमदो (किन्नौर, हिमाचल) |
| 2017 | गुरेज घाटी (जम्मू-कश्मीर) |
| 2018 | हर्षिल (उत्तराखंड) |
| 2019 | राजौरी (जम्मू-कश्मीर) |
| 2020 | लोंगेवाला (राजस्थान) |
| 2021 | नौशेरा (जम्मू-कश्मीर) |
| 2022 | कारगिल |
| 2023 | लेप्चा (हिमाचल प्रदेश) |
| 2024 | कच्छ (गुजरात) |
| 2026 | बस्तर (छत्तीसगढ़) |
निष्कर्ष: आंतरिक सुरक्षा से सशक्त होता भारत
प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से सुरक्षाकर्मियों के त्याग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, उसकी ओर बाहरी दुश्मन आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर पाते। नक्सल मुक्त भारत का यह ऐतिहासिक पड़ाव देश को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।














