सरकारी कार्यालय को निजी पार्किंग समझने वालों पर पुलिस का स्थायी शिकंजा, सीएसपी कार्यालय के मुख्य द्वार पर लगे बैरिकेड 17 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई और चालान के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, अब पुलिस ने रास्ता ही किया बंद

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सरकारी कार्यालय को निजी पार्किंग समझने वालों पर पुलिस का स्थायी शिकंजा, सीएसपी कार्यालय के मुख्य द्वार पर लगे बैरिकेड
17 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई और चालान के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, अब पुलिस ने रास्ता ही किया बं

कटनी। शहर में सार्वजनिक और सरकारी परिसरों को अपनी निजी पार्किंग समझकर इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति पर पुलिस ने अब सख्त संदेश देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। कोतवाली थाना अंतर्गत नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) कार्यालय परिसर में लंबे समय से चार पहिया वाहनों की अनधिकृत पार्किंग की समस्या बनी हुई थी। कई बार समझाइश, चालानी कार्रवाई और चेतावनी के बावजूद जब व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो अब पुलिस विभाग ने सीएसपी कार्यालय के मुख्य द्वार पर बैरिकेड लगाकर परिसर को अवैध पार्किंग से पूरी तरह मुक्त करने की व्यवस्था की है। यह कदम केवल वाहनों को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है, जो सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों को अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करने का अधिकार समझ बैठते हैं।

17 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई भी नहीं बदल सकी थी मानसिकता
सीएसपी कार्यालय परिसर में निजी चार पहिया वाहनों की पार्किंग का सिलसिला लंबे समय से चल रहा था। स्थिति ऐसी बन गई थी कि महत्वपूर्ण पुलिस कार्यालय का परिसर ही पार्किंग स्थल जैसा दिखाई देने लगा था। इस समस्या को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी के मद्देनजर 16 अक्टूबर 2026 को यातायात पुलिस ने विशेष कार्रवाई करते हुए परिसर में खड़े 17 से अधिक चार पहिया वाहनों को हटवाया था। जिन वाहन मालिकों से संपर्क हुआ, उन्हें तत्काल वाहन हटाने की समझाइश दी गई, जबकि अन्य वाहनों के चालान काटकर ऑनलाइन भेजे गए थे। दोबारा वाहन खड़ा करने पर चालानी कार्रवाई के साथ वाहन जब्त कर यातायात थाना झिंझरी भेजने की चेतावनी भी दी गई थी।
लेकिन कार्रवाई और समझाइश के बाद भी समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ। इससे स्पष्ट हुआ कि कुछ वाहन मालिकों के लिए नियमों की चेतावनी पर्याप्त नहीं थी। लिहाजा अब पुलिस विभाग ने ऐसी व्यवस्था की है, जिससे अनधिकृत वाहनों की परिसर तक पहुंच ही रोकी जा सके।

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बैरिकेडिंग से दिया व्यवस्था और अनुशासन का संदेश
सीएसपी कार्यालय के मुख्य द्वार पर बैरिकेड लगाए जाने के बाद अब परिसर में मनमाने ढंग से चार पहिया वाहन खड़े करना संभव नहीं होगा। यह व्यवस्था कार्यालय की सुरक्षा, सुचारु संचालन और प्रशासनिक अनुशासन को बनाए रखने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। कानून-व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील पुलिस कार्यालय में अनावश्यक वाहनों की आवाजाही और जमावड़ा किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।

एएसआई शशि भूषण दुबे की कार्रवाई से लेकर स्थायी व्यवस्था तक
16 अक्टूबर को हुई कार्रवाई में एएसआई शशि भूषण दुबे की अगुवाई में यातायात पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के आदेशानुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य एवं डीएसपी रत्नेश मिश्रा के निर्देश तथा टीआई अनूप सिंह और आरआई अंजू लकड़ा के मार्गदर्शन में उप निरीक्षक शशि भूषण दुबे, सहायक उप निरीक्षक अशोक सिंह, आरक्षक मंजय यादव, दीपक सिंह एवं राजकुमार अहिरवार ने कार्रवाई की थी। अब बैरिकेडिंग के माध्यम से उसी अभियान को व्यवस्था के स्तर पर आगे बढ़ाया गया है।

घर में पार्किंग की जगह, फिर सरकारी परिसर पर कब्जे की मानसिकता क्यों?

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कई वाहन मालिकों के घरों में पार्किंग की जगह उपलब्ध होने के बावजूद वे अपने वाहन सरकारी कार्यालय परिसर में खड़े कर रहे थे। सवाल यह है कि जब निजी वाहन के लिए निजी परिसर उपलब्ध है, तो सरकारी कार्यालय को पार्किंग स्थल बनाने की जरूरत ही क्यों, सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति अपनी सुविधा के लिए सरकारी संपत्ति और प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करने लगे।

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नियम केवल सड़क पर नहीं, सरकारी परिसरों में भी लागू होते हैं
सीएसपी कार्यालय में की गई यह पहल शहर के दूसरे सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। अक्सर लोग सड़क किनारे, कार्यालयों के प्रवेश द्वारों और सार्वजनिक परिसरों में वाहन खड़ा कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं। इससे न केवल आवागमन बाधित होता है, बल्कि सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पुलिस की इस कार्रवाई से एक बात साफ है कि सरकारी कार्यालय किसी की निजी पार्किंग नहीं हैं। नागरिकों को भी समझना होगा कि अनुशासन केवल पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। अपनी सुविधा के लिए सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना न तो अधिकार है और न ही जिम्मेदार नागरिक होने की पहचान। व्यवस्था तभी कायम रहेगी, जब नियमों का पालन कराने वाले सख्त होंगे और उनका पालन करने वाले जिम्मेदार।