
Police Commemoration Day, police shahid diwas प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद सुरक्षा वीरों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इसी के तहत आज कटनी में
स्मृति दिवस के अवसर पर झिंझरी स्थित पुलिस लाईन शहीद स्मारक में पुलिस शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
इस अवसर पर शहीदों को शस्त्र सलामी उपरांत पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार ने शहीदों के नामों का वाचन किया।
इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप मिश्रा, नगर पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला, उप पुलिस अधीक्षक आर पी मिश्र, वैज्ञानिक अधिकारी अवनीश सिसोदिया, एसडीओपी पी के सारस्वत, शिखा सोनी, रक्षित निरीक्षक लवली सोनी, यातायात प्रभारी राघवेन्द्र भार्गव, सभी थानों के थाना प्रभारी, सूबेदार सोनम उइके, सब इंस्पेक्टर उदयभान मिश्रा, मोनिका खड़से, संजीव रावत, विनोद दुबे, उमेश दुबे, रविन्द्र सिंह, रश्मि सोनकर तथा विशेष रूप से शहीदों के परिजन उपस्थित थे।
बलिदान को याद करते हुए मनाया जाता है ये दिवस
हमारे देश में सुरक्षाबलों के साथ साथ पुलिसकर्मियों के शौर्य और बलिदान का इतिहास भी किसी से कम नहीं है। साल 1959 में पुलिसकर्मी चीनी सैनिकों की गोलियां सीने पर खाकर शहीद हुए थे। देश की सेवा के लिए सैनिकों ने जो बलिदान दिया था, उसी की याद में हरसाल ये पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।

क्या हुआ था उस दिन?
21 अक्टूबर 1959 को 10 पुलिसकर्मियों ने अपना बलिदान दिया था। उस वक्त तिब्बत के साथ भारत की 2,500 मील लंबी सीमा की निगरानी भारतीय पुलिस के हवाले थी। 20 अक्टूबर को पुलिसकर्मियों की एक टोली लापता हो गई थी। अगले दिन इसकी तलाश में एक दूसरी टुकड़ी निकली। इसमें करीब 20 पुलिसकर्मी थे। जब ये टुकड़ी अपने लापता साथियों की तलाश कर रहे थे, उस वक्त चीनी सैनिकों ने पहाड़ी से गोलियां चलाना शुरू कर दिया। भारतीय पुलिसकर्मी निहत्थे थे। इस हमले में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। जबकि 7 जख्मी हुए थे।
कब से मनाया जाता है ये दिवस?
जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों का वार्षिक सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में लद्दाख में शहीद हुए वीर पुलिसकर्मियों और साल के दौरान ड्यूटी पर जान गंवाने वाले अन्य पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने का फैसला लिया गया। तब से ही ये दिवस मनाया जाने लगा।








