वाहनों की तेज हेड लाइटों से भी हो रहीं दुर्घटनाएं पर पुलिस की कार्रवाई नशे में वाहन चलाने और हेलमेट न लगाने वालों तक सीमित

कटनी(विवेक शुक्ला)। शहर की सडक़ों सहित राज्यमार्ग व राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाओं में जान केवल शराब के नशे या फिर हेलमेट न पहनने की वजह से नहीं जा रहीं हैं बल्कि गाडिय़ों की रंग-बिरंगी और तेज हेडलाइट्स से भी अधिकांश दुर्घटनाएं हो रही हैं तथा लोगों की जान जा रही है लेकिन पुलिस व प्रशासन केवल और केवल हेलमेट न पहनने वालों व शराब के नशे पर वाहन चलाने वालों को टारगेट करके सडक़ सुरक्षा अभियान चला रही है जबकि वाहनों की रंग-बिरंगी और तेज हेडलाइट्स होने वाली दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या बनती जा रही हैं क्योंकि ये अन्य ड्राइवरों की आंखों को चौंधिया (हसंतम) देती हैं। जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होती है। खासकर रात में सडक़ पर अचानक आने वाली बाधाओं को देखने में मुश्किल होती है। जिससे टक्कर या गलत लेन में जाने का खतरा बढ़ जाता है। खास करके नीली और सफेद एलईडी लाइटें ज़्यादा परेशान करती हैं, जो नियमों का उल्लंघन भी हैं और सुरक्षा के लिए खतरा भी हैं। जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है और सडक़ दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। बहरहाल सडक़ों पर दौड़ते नए वाहनों में लगी हाई-पावर एलईडी लाइटें रात को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रही हैं। इन लाइटों की चमक इतनी तेज होती है कि सामने से आने वाले वाहन चालक कुछ सेकंड के लिए अंधा-सा महसूस करते हैं और हादसे की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। पहले वाहनों में साधारण बल्ब की हेड लाइटें होती थीं और उनकी रोशनी नियंत्रित रहती थी। इतना ही नहीं हेडलाइट पर काली पट्टी लगाना अनिवार्य था ताकि सामने वाले को परेशानी न हो। लो और हाई बीम का प्रयोग भी होता था मगर अब न तो पट्टी का चलन है और न ही कोई वाहन चालक लो बीम में जाता है। खास बात तो यह है कि गाडिय़ों पर लगी रंग बिरंगी हेड लाइट्स के लिए पुलिस व प्रशासन कोई चेकिंग अभियान भी नहीं चलाता। हैरानी की बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग इस समस्या को लेकर पूरी तरह उदासीन हैं और दूसरे जिम्मेदार भी इस समस्या के प्रति बेपरवाह हैं। कुल मिलाकर ये रंगीन और तेज लाइटें सिर्फ दिखावे के लिए अच्छी लगती हैं लेकिन सुरक्षा के लिए बेहद हानिकारक हैं और सडक़ दुर्घटनाओं को बढ़ाती हैं।
वाहनों की हेड लाइट से होने वाली मुख्य समस्याएं
1-चौंधियाना-तेज और अलग रंग की लाइटें दूसरी गाडिय़ों के ड्राइवरों की आंखों की रोशनी छीन लेती हैं, जिससे वे आगे का रास्ता ठीक से देख नहीं पाते।
2-कम विजिबिलिटी-जब सामने से कोई ऐसी गाड़ी आती है तो बाकी सडक़ और पैदल यात्री धुंधले हो जाते हैं, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम हो जाता है।
3-गलत धारणा-कुछ रंग (जैसे नीला) आंखों को ज़्यादा परेशान करते हैं और थकान पैदा करते हैं, जिससे ड्राइवर का ध्यान भटकता है।
4-नियमों का उल्लंघन-कई देशों में हेडलाइट्स के रंग और तीव्रता के लिए नियम हैं, जिनका पालन नहीं किया जाता।
रंग-बिरंगी लाइट्स का यह है समाधान
1-ड्राइवरों के लिए-अपनी गाडिय़ों में उचित मानक और सही चमक वाली लाइटें लगाएं तथा तेज और रंगीन लाइटों से बचें।
2-नियमों का सख्ती से पालन-ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को तेज और गैर-कानूनी लाइटों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
3-जागरूकता-लोगों को बताना चाहिए कि वाहनों में नियम विरूद्ध लगाई जाने वाली रंग-बिरंगी लाइटें कितनी खतरनाक हैं।
4-तकनीकी समाधान-ऑटोमेटिक डिमिंग (स्वचालित मंद) लाइटें और एंटी-ग्लेयर चश्मे का उपयोग करना चाहिए।








