बाघेश्वर धाम में बोले पीएम मोदी- गुलामी की मानसिकता से घिरे हुए लोग हमारे मठ, मान्यताओं और मंदिरों पर, संत, संस्कृति और सिद्धांतों पर हमला करते रहते हैं

बाघेश्वर धाम। आज मध्यप्रदेश के ख्यातिप्राप्त बाघेश्वर धाम में पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी की मानसिकता से घिरे हुए लोग हमारे मठ, मान्यताओं और मंदिरों पर, संत, संस्कृति और सिद्धांतों पर हमला करते रहते हैं। प्रधानमंत्री यहां केंसर अस्पताल का भूमिपूजन करने आए थे। उनके साथ धाम के महंत धीरेंद्र शास्त्री थे।

पीएम मोदी ने बुंदेलखंडी में बोलकर अपने भाषण की शुरुआत की। मोदी ने कहा कि बहुत ही कम दिनों में मुझे दूसरी बार वीरों की इस धरती बुंदेलखंड आने का सौभाग्य मिला है। इस बार तो बालाजी का बुलावा आया है। ये हनुमान जी की कृपा है कि आस्था का ये केंद्र अब आरोग्य का केंद्र भी बनने जा रहा है। अभी मैंने यहां श्री बागेश्वर धाम मेडिकल साइंस एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट का भूमिपूजन किया है। ये संस्थान दस एकड़ में बनेगा।
मोदी ने कहा कि मेरे छोटे भाई धीरेंद्र शास्त्री काफी समय से एकता के मंत्र को देकर लोगों को जागरूक करते रहते हैं। अब उन्होंने समाज और मानवता के हित में एक और संकल्प लिया है। इस कैंसर संस्थान के निर्माण की जिम्मेदारी। यानी अब यहां बागेश्वर धाम में भजन, भोजन और निरोगी जीवन तीनों का आशीर्वाद मिलेगा। मोदी ने कहा कि साथियों हमारे मंदिर, हमारे मठ, हमारे धाम ये एक ओर पूजन और साधना के केंद्र रहे हैं तो दूसरी ओर विज्ञान और सामाजिक चिंतन, सामाजिक चेतना के भी केंद्र रहे हैं। हमारे ऋषियों ने ही हमें आयुर्वेद का विज्ञान दिया, योग का विज्ञान दिया, जिसका परचम पूरी दुनिया में लहरा रहा है। हमारी तो मान्यता ही है कि परहित सरिस धर्म नहीं भाई। अर्थात दूसरों की सेवा ही धर्म है। इसलिए नर में नारायण, जीव मे शिव, इस भाव से जीवमात्र का सेवा, यही हमारी परंपरा रही है।
पहले चरण में ही 100 बेड की सुविधा होगी। मैं इस काम के लिए धीरेंद्र शास्त्री को बधाई देता हूं। भाइयों बहनों नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो धर्म का मखौल उड़ाता है, उपहास उड़ाता है, लोगों को तोड़ने में जुटा है। और बहुत बार विदेशी ताकतें भी इन लोगों का साथ देकर देश और धर्म को कमजोर करने की कोशिश करती दिखती है। हिंदू आस्था से नफरत करने वाले ये लोग सदियों से किसी न किसी भेष में रहते रहे हैं।
पीएम ने कहा कि गुलामी की मानसिकता से घिरे हुए लोग हमारे मठ, मान्यताओं और मंदिरों पर, संत, संस्कृति और सिद्धांतों पर हमला करते रहते हैं। ये लोग हमारे पर्व, परंपरा और प्रथाओं को गाली देते हैं। जो संस्कृति स्वभाव से ही प्रगतिशील है उस पर ये कीचड़ उछालने की हिम्मत दिखाते हैं। हमारे समाज को बांटना, उसकी एकता को तोड़ना ही उनका मकसद है।
महाकुंभ की हर तरफ चर्चा हो रही है। महाकुंभ अब पूर्णता की ओर है। अब तक करोड़ों लोग वहां पहुंच चुके हैं। करोड़ों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई है। संतों के दर्शन किए हैं। अगर इस महाकुंभ की तरफ नजर करें तो सहज भाव उठ जाता है ये एकता का महाकुंभ है। आने वाली सदियों तक 144 वर्ष के बाद हुआ ये महाकुंभ एकता के महाकुंभ के रूप से प्रेरणा देता रहेगा और देश की एकता को मजबूती देने का अमृत परोसता रहेगा। लोग सेवाभाव से लगे हैं, जो भी कुंभ में गया है, एकता के दर्शन तो किए हैं, लेकिन जिन-जिनसे मेरा मिलना हुआ है, दो बातें महाकुंभ में गए हुए हर व्यक्ति के मुंह से हिंदुस्तान के कोने-कोने से सुन रहा हूं। एक स्वच्छता कर्मियों के गुणगान कर रहे हैं। चौबीसों घंटे जिस सेवाभाव में एकता के महाकुंभ में स्वच्छता कार्य को संभाल रहे हैं, मैं उन सभी को आदरपूर्वक नमन करता हूं।








