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नियम ताक पर:-शासकीय अहस्तांतरणीय भूमि पर एसडीएम ने किये नामांतरण के आदेश, ढीमरखेड़ा अनुभाग में पदस्थ रही तत्कालीन एसडीएम विंकी उईके का कारनामा, कलेक्टर की अनुमति के बिना कर दिए नामांतरण के आदेश  

कटनी(विवेक शुक्ला)। विधि का यह सुस्थापित सिद्धांत है कि म.प्र.शासन के द्वारा पट्टे पर प्रदान की गई भूमि या शासकीय अहस्तांतरणीय भूमि का न तो विक्रय किया जा सकता है और न ही उसका अंतरण किया जा सकता है। बावजूद इसके नियमों को धत्ता बताकर कटनी जिले के ढीमरखेड़ा अनुभाग में पदस्थ रही तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती विंकी उईके सिंहमारे के द्वारा अपील के तीन प्रकरणों में विधि की घोर अव्हेलना, पद का दुरूपयोग करते हुये नामांतरण के आदेश पारित करते हुये शासकीय अहस्तांतरणीय भूमि पर अपीलार्थियों के नाम दर्ज करने के आदेश दिये गये है।

ये है मामला

मंत्री, राजस्व विभाग म.प्र.शासन, प्रमुख सचिव राजस्व विभाग भोपाल, संभागायुक्त जबलपुर संभाग, कलेक्टर कटनी को सौंपी गई एक शिकायत में बताया गया है कि तत्कालीक एसडीएम के द्वारा नामांतरण के तीन अपीलीय प्रकरणों में पद का दुरूपयोग कर आदेश पारित किये गये है जो इस प्रकार है।

प्रकरण क्रमांक-1

अधिनस्थ न्यायालय नायब तहसीलदार उमरियापान, तहसील ढीमरखेडा, जिला कटनी के द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक-0717/अ-6/2024.25, आदेश दिनांक 30/12/2024, आवेदक बबली पिता बेनी प्रसाद निवासी सिहोरा के द्वारा ग्राम जमुनिया पहन-28, रानिमं-28, राजस्व निरीक्षक मंडल उमरियापान में स्थित कृषि भूमि खसरा नं-1, 13, 21, 22, 27 रकबा 0.65, 0.20, 202, 0.57, 0.03 है। भूनि का नामांतरण किये जाने न्यायालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसमें न्यायालय के द्वारा पटवारी रिपोर्ट आहूत की गई। हल्का पटवारी के द्वारा बताया गया कि मिसल बंदोबस्त में उक्त भूमि शासकीय पट्टे की भूमि होकर अहस्तांतरणीय भूमि है। लिहाजा अधिनस्थ न्यायालय के द्वारा आवेदक का आवेदन पत्र निरस्त कर दिया गया। तत्पश्चात अपीलार्थी के द्वारा अपीलीय न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ढीमरखेड़ा के समक्ष एक अपील अंतर्गत धारा 44 म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत अपील पेश की गई। जिसका राजस्व प्रकरण क्रमांक-0063/अपील/2024-25 होकर आदेश दिनांक 13/02/2025 को अपीलार्थी को लाभ पहुंचाने की मंशा से तत्कालीक एसडीएम के द्वारा अधिनस्थ न्यायालय के आदेश को नजरअंदाज करते हुये नामांतरण आदेश पारित कर अपीलार्थी को लाभ पहुंचाया गया।

प्रकरण क्रमांक.2

इसी तरह से अधिनस्थ न्यायालय तहसीलदार ढीमरखेड़ा, तहसील ढीमरखेड़ा, जिला कटनी के द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक-0417/अ.-06/2019-20, आदेश दिनांक 06/03/2020, आवेदक अशोक कुमार कोल पिता मुल्लू कोल, निवासी रविन्द्रनाथ टैगोर वार्ड, अमीरगंज कटनी, तहसील व जिला कटनी म.प्र. के द्वारा मौजा-साहडार, पहनं-29, रानिमं-ढीमरखेड़ा में स्थित खसरा नं-45 रकवा 1.55 हेक्टेयर भूमि का नामांतरण किये जाने न्यायालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसमें न्यायालय के द्वारा पटवारी रिपोर्ट आहूत की गई, हल्का पटवारी के द्वारा बताया गया कि मिसल बंदोबस्त में उक्त भूमि शासकीय पट्टे की भूमि होकर अहस्तांतरणीय भूमि है। लिहाजा अधिनस्थ न्यायालय के द्वारा आवेदक का आवेदन पत्र निरस्त कर दिया गया। तत्पश्चात अपीलार्थी के द्वारा एक अपीलीय न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ढीमरखेड़ा के समक्ष एक अपील अंतर्गत धारा 44 मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत अपील पेश की गई। जिसका राजस्व प्रकरण क्रमांक 0001/अपील/2025-26 पक्षकार अशोक कुमार कोल विरुद्ध मंलगा उर्फ मंलता गौंड, आदेश दिनांक 17/04/2025 में भी अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा अपीलार्थी को लाभ पहुंचाने की मंशा से नामांतरण आदेश पारित किये गये। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि अधिनस्थ न्यायालय तहसीलदार ढीमरखेड़ा के द्वारा वर्ष 2020 में नामांतरण आवेदन पत्र खारिज किये गये है। बावजूद इसके अपीलीय न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी ढीमरखेड़ा के द्वारा धारा 5 मियाद अधिनियम का कोई उल्लेख पारित नामांतरण आदेश में न करते हुये नियम विरूद्ध आदेश पारित किया गया।

प्रकरण क्रमांक-3

इसी तरह से एक और अन्य प्रकरण में अधिनस्थ न्यायालय तहसीलदार ढीमरखेड़ा, तहसील ढीमरखेड़ा, जिला कटनी के द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक-0416/31-06/2019-20, आदेश दिनांक 06/03/2020, आवेदक अशोक कुमार कोल पिता मुल्लू कोल, निवासी रविन्द्रनाथ टैगोर वार्ड, अमीरगंज कटनी, तहसील व जिला कटनी मप्र के द्वारा मौजा-साहडार, पहनं-29, रानिमं-ढीमरखेड़ा में स्थित खसरा नं-49 रकवा 1.55 हे भूमि का नामांतरण किये जाने न्यायालय तहसीलदार ढीमरखेड़ा के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसमें न्यायालय के द्वारा पटवारी रिपोर्ट आहूत की गई, हल्का पटवारी के द्वारा बताया गया कि मिसल बंदोबस्त में उक्त भूमि शासकीय पट्टे की भूमि होकर अहस्तांतरणीय भूमि है। लिहाजा अधिनस्थ न्यायालय के द्वारा आवेदक का आवेदन पत्र निरस्त कर दिया गया। तत्पश्चात अपीलार्थी के द्वारा न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ढीमरखेड़ा के समक्ष एक अपील अंतर्गत धारा 44 मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत अपील पेश की गई। जिसका राजस्व प्रकरण क्रमांक-0002/अपील/2025-25 पक्षकार अशोक कुमार कोल विरुद्ध प्रेम सिंह गौड़ आदेश दिनांक 17/04/2025 में भी तत्कालीक एसडीएम श्रीमती विंकी उईके सिंहमारे द्वारा अधिनस्थ न्यायालय के आदेश को अनदेखा करते हुये शासकीय अहस्तांतरणीय भूमि पर नामांतरण आदेश पारित किये है।

कलेक्टर की अनुमति नहीं फिर भी धड़ाधड़ हुये आदेश

यह सनद रहे कि मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 158(3) में प्रावधान दिये गये है कि जो व्यक्ति राज्य सरकार या कलेक्टर द्वारा पट्टे या आवंटन के माध्यम से भूमिस्वामी अधिकार में भूमि धारण करता है। वह पट्टे या आवंटन की तारीख से 10 वर्ष के भीतर भूमि का अंतरण नहीं कर सकता है। यदि वह 10 वर्ष के बाद भूमि का अंतरण करना चाहता है तो उसे कलेक्टर से अनुमति प्राप्त करनी होगी। तत्कालीन एसडीएम के द्वारा अपील के तीन नामांतरण प्रकरणों में विधि की घोर अव्हेलना की गई। चूंकि संबंधित व्यक्तियों के द्वारा कलेक्टर से इस संबंध में मंजूरी नहीं ली गई है।

पदस्थाना से स्थानांतरण दिनांक में पारित आदेशों में हो जांच

शिकायतकर्ता के द्वारा सौंपी गई शिकायत में यह भी मांग की गई है कि तत्कालीन एसडीएम विंकी उईके सिंहमारे के द्वारा ढीमरखेड़ा में पदस्थापना के दौरान कई तरह की घोर अनियमितता की गई है। लिहाजा इस संबंध में अपीलीय नामांतरण के प्रकरणों सहित अन्य प्रकरणों में पुन: जांच करवाया जाना नितांत आवश्यक है। चूंकि एसडीएम के द्वारा अपने पद का दुरूपयोग कर संबंधित व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की मंशा से विधि विरूद्ध रूप से आदेश पारित किये गये है जो विधि के अनुकूल नहीं है। पुन: जांच होने से प्रकरण गुणदोष के आधार पर निराकृत हो सकेगा।

 

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