अब आमने-सामने पुलिस और प्रदर्शनकारी!” जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति मांगने पहुंची पुलिस, SC ने दिए SIT जांच के आदेश

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अब आमने-सामने पुलिस और प्रदर्शनकारी!” जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति मांगने पहुंची पुलिस, SC ने दिए SIT जांच के आदेश

नई दिल्ली: पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन अब पुलिस बनाम प्रदर्शनकारियों के बीच गंभीर कानूनी व प्रशासनिक टकराव का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और कथित बर्बरता को लेकर जहां विपक्षी दल और छात्र संगठन आक्रामक हैं, वहीं अब दिल्ली पुलिस महासंघ भी जवाबी रुख अपनाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांग रहा है।

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए हिंसा और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन के संकेत दिए हैं।

दिल्ली पुलिस महासंघ ने मांगी जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति

प्रदर्शन के दौरान हुए हमलों में पुलिसकर्मियों के घायल होने के विरोध में दिल्ली पुलिस महासंघ ने मोर्चा खोला है:

  • पत्र भेजकर मांगी अनुमति: महासंघ ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर 31 जुलाई को जंतर-मंतर पर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरने की अनुमति मांगी है।

  • रिटायर्ड पुलिसकर्मियों का समर्थन: महासंघ के अनुसार, इस प्रस्तावित धरने में पूर्व (रिटायर्ड) दिल्ली पुलिसकर्मी और कानून का पालन करने वाले नागरिक शामिल होंगे, जो शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

  • पुलिसकर्मियों के घायल होने का मुद्दा: 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प में 130 से अधिक पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने 15 एफआईआर दर्ज की हैं।

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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “SIT गठित हो सकती है, किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं”

सुप्रीम कोर्ट में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने महत्वपूर्ण बातें कही हैं:

  1. निष्पक्ष जांच के लिए SIT: शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की पारदर्शी जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा सकता है।

  2. पुलिस और छात्रों दोनों पर हमले की जांच: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां छात्रों पर हुई पुलिस की अति (ज्यादतियों) की जांच जरूरी है, वहीं 250 से अधिक पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की भी जांच होनी चाहिए कि यह हमला छात्रों ने किया था या कुछ असामाजिक तत्वों ने।

  3. उपद्रवियों की संलिप्तता: सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हिंसा में सामान्य छात्र शामिल नहीं थे, बल्कि गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित कुछ असामाजिक व उपद्रवी तत्वों ने भीड़ का फायदा उठाकर पुलिस पर पथराव और हमला किया।अब आमने-सामने पुलिस और प्रदर्शनकारी!” जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति मांगने पहुंची पुलिस, SC ने दिए SIT जांच के आदेश