भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत: 8 नेक्स्ट जनरेशन युद्धपोत के लिए 53,866 करोड़ का रक्षा समझौता, लाखों रोजगार होंगे पैदा

05 09 2020 indian navy 20709984

भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत: 8 नेक्स्ट जनरेशन युद्धपोत के लिए 53,866 करोड़ का रक्षा समझौता, लाखों रोजगार होंगे पैदा

नई दिल्ली। देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 8 ‘नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट’ (युद्धपोत) के निर्माण के लिए गार्डन रीच शिपयार्ड्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ 53,866.50 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस करार पर दस्तखत किए गए।

GRSE बनाएगा 5 और GSL तैयार करेगा 3 युद्धपोत अनुबंध के अनुसार, GRSE कोलकाता 5 युद्धपोतों का निर्माण करेगा, जबकि GSL गोवा 3 युद्धपोत बनाएगा। इन सभी 8 युद्धपोतों का डिज़ाइन भारतीय नौसेना खुद तैयार करेगी। यह भारत में स्वदेशी युद्धपोत डिज़ाइन और निर्माण की दिशा में ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

आधुनिक मिसाइलों और सेंसर सिस्टम से होंगे लैस ये नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट आधुनिक मिसाइलों, स्टील्थ तकनीक, उन्नत हथियारों और हाई-टेक सेंसर सिस्टम से पूरी तरह लैस होंगे। इनकी मदद से नौसेना हवा, सतह और समुद्र के भीतर तीनों प्रकार की चुनौतियों से निपटने में सक्षम होगी। ये युद्धपोत समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, दुश्मन की पनडुब्बियों पर नज़र रखने और तटीय सुरक्षा में बेहद अहम भूमिका निभाएंगे।

रक्षा उद्योग को बढ़ावा, 500 लाख से अधिक मानव कार्य दिवसों का रोजगार इस mega प्रोजेक्ट से न केवल नौसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश के रक्षा उद्योग और MSME सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा। अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में शिपयार्डों में लगभग 72 लाख और सहायक उद्योगों व MSME सेक्टर में 460 लाख मानव कार्य दिवसों (Man-days) के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मेड इन इंडिया उपकरणों और स्वदेशी तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल कर यह परियोजना रक्षा निर्माण क्षेत्र में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ को एक नया आयाम देगी।