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अब कैंपस में ‘बंदरगिरी’ नहीं चलेगी! नौकरी में आया अनोखा ट्विस्ट—इंसानों की जगह लंगूर बना कॉलेज का गार्ड, सैलरी ₹12 हजार

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अब कैंपस में ‘बंदरगिरी’ नहीं चलेगी! नौकरी में आया अनोखा ट्विस्ट—इंसानों की जगह लंगूर बना कॉलेज का गार्ड, सैलरी ₹12 हजार। डीएस डिग्री कॉलेज में बंदरों के आतंक से निपटने के लिए एक अनोखा और चर्चा में आया कदम उठाया गया है। कॉलेज प्रशासन ने ‘गोलू’ नाम के एक लंगूर को गार्ड के रूप में तैनात किया है, जिसकी मासिक सैलरी 12 हजार रुपये तय की गई है।

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अब कैंपस में ‘बंदरगिरी’ नहीं चलेगी! नौकरी में आया अनोखा ट्विस्ट—इंसानों की जगह लंगूर बना कॉलेज का गार्ड, सैलरी ₹12 हजार

छह महीने से कर रहा ड्यूटी

यह अनोखी व्यवस्था करीब छह महीने पहले शुरू की गई थी। गोलू की ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक रहती है। इस दौरान वह पूरे कॉलेज परिसर में गश्त करता है और जैसे ही बंदरों का झुंड दिखाई देता है, वे उसकी मौजूदगी से ही भाग जाते हैं।

बंदरों के आतंक से राहत

पहले कॉलेज परिसर में बंदरों के कारण छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई बार डर और हमलों की वजह से छात्रों को रास्ता बदलकर जाना पड़ता था और क्लास तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। लेकिन अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है और छात्र बेफिक्र होकर कैंपस में आ-जा रहे हैं।

प्रशासन का अनोखा प्रयोग सफल

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश भारद्वाज के अनुसार, इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। गोलू के आने के बाद बंदरों का उत्पात काफी हद तक कम हो गया है और परिसर पहले से अधिक सुरक्षित महसूस हो रहा है।

छात्रों के बीच बना आकर्षण

गोलू अब सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि छात्रों के बीच आकर्षण का केंद्र भी बन गया है। सोशल मीडिया पर उसके साथ सेल्फी लेने का ट्रेंड भी तेजी से वायरल हो रहा है।

यह पहल दिखाती है कि स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए अगर रचनात्मक सोच अपनाई जाए, तो प्रभावी और अनोखे परिणाम मिल सकते हैं।

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