रसोई गैस का नया विकल्प: अब एलपीजी सिलेंडर की जगह इथेनॉल पर पकेगा खाना- सितंबर तक आएगी नई सरकारी पॉलिसी; जानें कैसे काम करेगा ‘इथेनॉल ATM’
नई दिल्ली: पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) की बड़ी सफलता के बाद, केंद्र सरकार अब देश की एनर्जी सिक्योरिटी और ग्रीन फ्यूल के मोर्चे पर एक और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। जल्द ही इथेनॉल आपकी रसोई में कुकिंग फ्यूल (रसोई गैस) के रूप में प्रवेश कर सकता है। अगर सरकार की यह योजना धरातल पर उतरती है, तो पारंपरिक एलपीजी (LPG) सिलेंडरों पर आम जनता की निर्भरता काफी कम हो जाएगी, जिससे घरेलू रसोई बजट को भी बड़ी राहत मिलेगी।
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री इस समय इथेनॉल को खाना पकाने के मुख्य ईंधन के तौर पर पेश करने के लिए एक मजबूत पॉलिसी फ्रेमवर्क पर काम कर रही है, जिसमें उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने और इसके लिए एक मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने की शर्तें शामिल होंगी।
सितंबर तक तैयार होगी देश की पहली ‘अल्टरनेटिव क्लीन कुकिंग पॉलिसी’
उद्योग जगत के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि घरों में एलपीजी के साथ-साथ इथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के रूप में अपनाने के लिए एक वैकल्पिक क्लीन कुकिंग पॉलिसी पर तेजी से काम चल रहा है।
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सितंबर तक उम्मीद: यह नई पॉलिसी सितंबर तक पूरी तरह तैयार हो सकती है।
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स्टोव की टेस्टिंग शुरू: सरकार के निर्देश पर देश में इथेनॉल-बेस्ड कुकिंग स्टोव (इथेनॉल से चलने वाले चूल्हों) की टेस्टिंग पहले ही शुरू की जा चुकी है, ताकि घरों को एक सुरक्षित और क्लीन फ्यूल का विकल्प दिया जा सके।
देश में है इथेनॉल की बंपर सप्लाई (7 बिलियन लीटर क्षमता एक्स्ट्रा)
खाना पकाने के ईंधन के तौर पर इथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे सबसे बड़ा कारण देश में इसकी भारी और सरप्लस सप्लाई है:
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क्षमता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता सालाना 20 बिलियन लीटर से ज्यादा हो गई है। इस फाइनेंशियल ईयर में 4 बिलियन लीटर की अतिरिक्त क्षमता और जुड़ने वाली है।
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बचे हुए स्टॉक का सही इस्तेमाल: सरकार के E20 पेट्रोल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए सालाना 11 बिलियन लीटर और फार्मा-केमिकल इंडस्ट्रीज के लिए 3.5 बिलियन लीटर इस्तेमाल होने के बाद भी, देश में लगभग 7 बिलियन लीटर इथेनॉल क्षमता बिना इस्तेमाल के बच जाती है। इसी सरप्लस का इस्तेमाल अब भारतीय रसोई में किया जाएगा।
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पेट्रोल पंपों पर लगेंगे ‘इथेनॉल ATM’, कैनिस्टर में मिलेगा फ्यूल
इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) एक बेहद अनोखे और आधुनिक मॉडल पर काम कर रही हैं:
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इथेनॉल ऑटोमेटेड टेलर मशीन (ATM): तेल कंपनियों से उनके फ्यूल रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) पर ‘इथेनॉल ATM’ लगाने को कहा जा सकता है।
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कैनिस्टर मॉडल: उपभोक्ता इन एटीएम पर जाकर अपने कुकिंग स्टोव के लिए कैनिस्टर (विशेष जार या डिब्बे) में इथेनॉल आसानी से रीफिल करवा सकेंगे।
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इंसेंटिव और सब्सिडी: सरकार इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक सब्सिडी स्कीम भी शुरू कर सकती है। यह या तो नया स्टोव खरीदने के लिए वन-टाइम कैपिटल सपोर्ट के रूप में होगी या फिर ईंधन पर मिलने वाली वित्तीय मदद के रूप में।
वेस्ट एशिया संकट और एलपीजी आयात पर निर्भरता घटाने की मजबूरी
इस कदम के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भी एक बड़ी वजह है:
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सप्लाई चेन का जोखिम: वेस्ट एशिया (खाड़ी देशों) में जारी युद्ध की वजह से भारत की एलपीजी सप्लाई और उसके रूट (जैसे होर्मुज स्ट्रेट) पर जोखिम हमेशा बना रहता है।
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स्ट्रैटेजिक स्टोरेज: हालांकि भारत ने अपने एलपीजी स्रोतों में विविधता लाई है, फिर भी तेल कंपनियां एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए 30 दिनों के स्ट्रैटेजिक एलपीजी स्टोरेज प्लान पर काम कर रही हैं।
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₹2 लाख करोड़ की महा-बचत: इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत ई-कुकिंग और बायोगैस/इथेनॉल जैसे विकल्पों को तेजी से अपनाता है, तो देश साल 2050 तक एलपीजी सब्सिडी में कुल 2 लाख करोड़ रुपये ($24 अरब) से ज्यादा की भारी बचत कर सकता है।
— बिजनेस एवं इकोनॉमी डेस्क, विशेष कवरेज
