भोलेनाथ की अनंत कृपा से आलोकित हुआ नीलकंठेश्वर भक्ति धाम,36वीं वर्षगांठ पर उमड़ा आस्था का महासागर, शिवभक्ति में डूबा समूचा नगर
भोलेनाथ की अनंत कृपा से आलोकित हुआ नीलकंठेश्वर भक्ति धाम,36वीं वर्षगांठ पर उमड़ा आस्था का महासागर, शिवभक्ति में डूबा समूचा नग
कटनी/विजयराघवगढ़।। विजयराघवगढ़ विधानसभा की पावन धरती पर स्थित नीलकंठेश्वर भक्ति धाम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब श्रद्धा, सेवा और समर्पण एक साथ प्रवाहित होते हैं, तो कोई भी स्थान केवल मंदिर नहीं रहता वह जीवंत आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन जाता है। महाशिवरात्रि महोत्सव एवं धाम की 36वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने नगर को एक दिव्य धार्मिक नगरी में परिवर्तित कर दिया। दूर-दराज़ के जिलों, नगरों और ग्रामीण अंचलों से आए श्रद्धालुओं के जनसैलाब ने यह दृश्य उपस्थित कर दिया मानो कैलाश पर्वत की छाया स्वयं इस धरा पर उतर आई हो। गरीब–अमीर, युवा वृद्ध, महिला पुरुष हर वर्ग, हर जाति, हर समुदाय एक सूत्र में बंधकर भोलेनाथ के श्रीचरणों में नतमस्तक दिखाई दिया।
कार्यक्रम के संरक्षक बने आस्था के स्तंभ
इस विराट आयोजन की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब कार्यक्रम के संरक्षक संजय सत्येंद्र पाठक एवं गणेश सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों जनप्रतिनिधियों ने न केवल कार्यक्रम में सहभागिता की, बल्कि आयोजकों की भक्ति, सेवा और तपस्या की मुक्तकंठ से सराहना कर श्रद्धालुओं का मन जीत लिया।
प्रथम दिवस : शिव बारात में उमड़ा जनसैलाब
महोत्सव के प्रथम दिवस शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक एवं भव्य शिव बारात ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हर-हर महादेव के जयघोष, घनघोर घंटानाद और शंखध्वनि से संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा।
इस पावन अवसर पर श्रीकांत चतुर्वेदी (मैहर विधायक), वीरेंद्र बहादुर सिंह (बड़वारा विधायक), मनीष पाठक (नगर निगम अध्यक्ष), युवा समाजसेवी यस पाठक सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शिवभक्ति में लीन होकर शिव बारात में सम्मिलित हुए।
शिव बारात की झांकियाँ अद्भुत, अलौकिक और भावनाओं से परिपूर्ण थीं—भस्म रमाए भोलेनाथ, माता पार्वती, गणों की टोली और नृत्य करते भक्त… ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो त्रेता और द्वापर युग की झलक वर्तमान में साकार हो उठी हो।
द्वितीय दिवस : गुरु आशीर्वाद, पूर्णाहुति और भजनों की अमृतधारा
द्वितीय दिवस का शुभारंभ गुरु श्रीचरणों से हुआ। खजुरी ताल वाले गुरुदेव श्री रामाआनंदाचार्य जी महाराज के भव्य स्वागत के साथ कार्यक्रम ने आध्यात्मिक ऊँचाई प्राप्त की। गुरु वाणी से आशीर्वाद पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। गुरुदेव ने कहा—
नीलकंठेश्वर भक्ति धाम का कण-कण शिवमय है। यहाँ की भक्ति अलौकिक है और भोलेनाथ की कृपा सदैव इस धाम पर बनी रहेगी। दोपहर में पूर्णाहुति ग्रोवर परिवार द्वारा संपन्न कराई गई। इसके पश्चात श्रद्धालु संगीत संध्या स्थल पर पहुँचे, जहाँ सुप्रसिद्ध भजन गायक हेमंत ब्रजवासी ने अपनी सरस्वती-स्पर्शी वाणी से भोलेनाथ के भजनों की ऐसी रसधारा बहाई कि श्रोता देर रात तक मंत्रमुग्ध रहे।
भक्ति, भाव और सुरों के संगम ने वातावरण को इतना दिव्य बना दिया कि हर हृदय नृत्य करने लगा, हर आत्मा शिव में लीन हो गई।
जनप्रतिनिधियों के भावपूर्ण उद्गार
इस अवसर पर विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने मंच से कहा मदनलाल ग्रोवर और बाबू ग्रोवर की भक्ति को शब्दों में बाँधना संभव नहीं। यह आयोजन कोई सामान्य कार्य नहीं, यह तपस्या है, साधना है। नीलकंठेश्वर धाम परिवार सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने हेमंत ब्रजवासी के भजनों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी मधुर और भावपूर्ण वाणी विरले ही सुनने को मिलती है।
वहीं सांसद गणेश सिंह ने कहा मैं हर बार यहाँ भोलेनाथ के दर्शन और बाबू ग्रोवर के स्नेह से फलीभूत होकर लौटता हूँ। यह आयोजन केवल ग्रोवर परिवार का नहीं, हम सबका है। इससे हमें सेवा, समर्पण और परोपकार की प्रेरणा मिलती है।
लाखों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
पूरे आयोजन के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। प्रभु इच्छा तक देर रात चलता रहा भंडारा—एक ओर प्रसादी की सुगंध, दूसरी ओर भजनों की मधुर लहरियाँ… पूरा परिसर शिवमय हो उठा।
आयोजकों की भावुक अभिव्यक्ति
कार्यक्रम की पूर्णाहुति शिवभक्त मदनलाल ग्रोवर, बाबू ग्रोवर एवं रुद्राक्ष ग्रोवर द्वारा की गई।
बाबू ग्रोवर ने भावुक स्वर में कहा आप सभी भक्तों का स्नेह और आशीर्वाद ही हमारी शक्ति है। माता-पिता मेरे लिए ईश्वर समान हैं। उनकी प्रसन्नता ही मेरी पूजा है, वही मेरे जीवन का प्रसाद है। उनके इन शब्दों ने उपस्थित जनसमूह की आँखें नम कर दीं।
नीलकंठेश्वर धाम : मंदिर नहीं, आस्था का विराट प्रतीक
आज नीलकंठेश्वर भक्ति धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और संस्कारों का जीवंत केंद्र बन चुका है। यहाँ हर वर्ष महाशिवरात्रि पर भक्ति का महासागर उमड़ता है और हर हृदय से एक ही स्वर गूंजता हैजय भोलेनाथ ,जहाँ हर नर-नारी भजनों में झूमता है,जहाँ हर मन सेवा की भावना से भर उठता है,
और जहाँ नगर की आत्मा स्वयं शिवमय हो जाती है।








