MP Higher Education Crisis: एमपी के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में 80% शिक्षकों के पद खाली; 4 यूनिवर्सिटी तो पूरी तरह ‘शून्य’, कैसे सफल होगी NEP?
भोपाल: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को देश में सबसे पहले लागू कर वाहवाही बटोरने वाले मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा का ढांचा वर्तमान में एक बेहद कड़े और अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी ने इस महत्वाकांक्षी नीति के प्रभावी और विधिक क्रियान्वयन पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधिकारिक रिपोर्ट और लाइव डेटा के विन्यास के अनुसार, मध्य प्रदेश के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के कुल 2,103 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल 420 पदों पर ही नियमित नियुक्तियां हैं। शेष 1,683 पद पूरी तरह रिक्त पड़े हैं। यानी प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था इस समय लगभग 80 प्रतिशत खाली पदों और अतिथि विद्वानों के अस्थायी सहारे के भरोसे वेंटिलेटर पर चल रही है।
कड़ा संकट: इन 4 विश्वविद्यालयों में ‘एक भी’ नियमित शिक्षक नहीं
प्रदेश के चार नवस्थापित विश्वविद्यालयों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक और कड़क है, जहां प्रशासनिक भवन तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन अध्यापन के लिए एक भी नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं है:MP Higher Education Crisis: एमपी के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में 80% शिक्षकों के पद खाली; 4 यूनिवर्सिटी तो पूरी तरह ‘शून्य’, कैसे सफल होगी NEP?
- महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (छतरपुर): 140 स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षक – शून्य।
- क्रांतिसूर्य टंटया भील विश्वविद्यालय (खरगोन): 140 स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षक – शून्य।
- क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय (गुना): 140 स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षक – शून्य।
- रानी अवंतीबाई विश्वविद्यालय (सागर): 140 स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षक – शून्य।
कागजों पर स्वीकृतियां: इन चारों उच्च शिक्षण संस्थानों में 140-140 स्वीकृत पद होने के बावजूद वर्तमान में शत-प्रतिशत (100%) पद रिक्त पड़े हैं।
राजधानी भोपाल के शिक्षण संस्थान भी गहरे संकट में
प्रदेश की राजनैतिक और प्रशासनिक राजधानी भोपाल में स्थित बड़े-बड़े विश्वविद्यालय भी इस स्टाफ संकट से अछूते नहीं हैं:
- भोज मुक्त विश्वविद्यालय: इस विश्वविद्यालय में वर्तमान में 84 तकनीकी व सामान्य पाठ्यक्रम संचालित हैं और करीब 1 लाख विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए पूरे संस्थान में महज 4 नियमित शिक्षक ही कार्यरत हैं।
- बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU): यहाँ भी स्वीकृत 105 पदों के मुकाबले सिर्फ 36 शिक्षक ही कमान संभाले हुए हैं, जबकि 69 पद पूरी तरह खाली हैं।
नई शिक्षा नीति (NEP) के आधुनिक पाठ्यक्रमों पर कड़ा ग्रहण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विधिक विन्यास के तहत विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, एविएशन, वेब डिजाइनिंग जैसे बेहद आधुनिक और कड़े तकनीकी पाठ्यक्रम तो शुरू कर दिए गए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब इन विषयों को कड़ाई से पढ़ाने के लिए नियमित और योग्य प्रोफेसर ही नहीं होंगे, तो इन डिग्रियों की गुणवत्ता और संचालन पूरी तरह प्रभावित होना तय है।
सरकार का विधिक पक्ष: जल्द होंगी नियमित भर्तियां
इस कड़क और संवेदनशील मुद्दे पर मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने आधिकारिक विन्यास स्पष्ट करते हुए कहा है:
“विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रिक्त पड़े इन सभी पदों को भरने के लिए हाल ही में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई है। विभाग को जल्द से जल्द खाली पदों को भरने के विधिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। समय-समय पर इसके लिए आवश्यक विज्ञापन जारी कर नियमानुसार भर्ती की कार्रवाई कड़ाई से की जा रही है।”
📊 MP यूनिवर्सिटी स्टाफ लाइव डेटा 2026: एक नज़र में रिक्तियों का विन्यास
प्रदेश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में स्वीकृत, कार्यरत और खाली पदों की कड़क सांख्यिकी इस प्रकार है:
| विश्वविद्यालय का नाम | कुल स्वीकृत पद | कार्यरत नियमित शिक्षक | खाली पदों की संख्या |
| राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय | 175 | 00 | 175 |
| देवी अहिल्या विश्वविद्यालय | 154 | 81 | 73 |
| बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) | 105 | 36 | 69 |
| रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय | 156 | 18 | 138 |
| विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन | 161 | 49 | 112 |
| जीवाजी विश्वविद्यालय | 104 | 24 | 80 |
| डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय | 113 | 07 | 106 |
| पं. एस.एन. शुक्ल विश्वविद्यालय, शहडोल | 121 | 24 | 97 |
| भोज मुक्त विश्वविद्यालय | 54 | 04 | 50 |
| महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, चित्रकूट | 119 | 64 | 55 |
| नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी | 91 | 32 | 59 |
| धर्मशास्त्र विधि विश्वविद्यालय | 57 | 22 | 35 |
