धार भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; खसरा नंबर 596 पर जुमे की नमाज की मिली इजाजत

धार भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; खसरा नंबर 596 पर जुमे की नमाज की मिली इजाजत

धार भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; खसरा नंबर 596 पर जुमे की नमाज की मिली इजाजत

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि जुमे की नमाज के लिए खसरा नंबर 596 (दरगाह की जमीन) उपलब्ध कराई जाए।

अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि वह हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच इस निर्धारित स्थल पर सुरक्षा और जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करे।

 समाचार के मुख्य बिंदु

 सुनवाई में क्या-क्या हुआ?

1. मुस्लिम पक्ष ने दूरी पर उठाया सवाल

मुस्लिम समुदाय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई के पिछले आदेश के बावजूद प्रशासन ने जो जगह आवंटित की थी, वह भोजशाला से करीब 1.3 किमी दूर थी। उन्होंने कहा कि परिसर के ठीक पास दरगाह की खाली जमीन (खसरा नंबर 596) मौजूद है, जिसे नमाज के लिए दिया जा सकता है।

2. सुप्रीम कोर्ट का रुख और आदेश

कोर्ट ने साइट प्लान देखने के बाद कहा कि दरगाह से जुड़ी यह जमीन मुख्य परिसर के पास है और इसका रास्ता अलग है, इसलिए शांतिपूर्वक नमाज अदा करने के लिए यह उचित जगह प्रतीत होती है। अदालत ने अपने आदेश को स्पष्ट करते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह बिना किसी देरी के 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए समुचित व्यवस्था करे।

धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय माता सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद का हिस्सा बताता है। यह मामला फिलहाल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें एएसआई (ASI) सर्वे का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम है और मुख्य याचिका पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

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