भोपाल)। प्रधानमंत्री की विशेष रुचि वाला स्वच्छ भारत मिशन भी मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों की दशा नहीं बदल पाया। प्रदेश में वर्तमान में करीब 29 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में शौचालय नहीं हैं। इससे न सिर्फ इन केंद्रों में कार्यरत कर्मचारी परेशान हैं, बल्कि केंद्रों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी दिक्कत होती है। सिर्फ शौचालय ही नहीं, केंद्रों में पेयजल सहित अन्य सुविधाओं का भी अभाव है। पिछले दिनों महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। इसमें देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बताई गई है। लोकसभा में पेश मंत्रालय के जवाब के मुताबिक मध्य प्रदेश में 97 हजार 135 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 68 हजार 235 केंद्रों में शौचालय है, जबकि 28 हजार 900 केंद्रों में नहीं है।
यह स्थिति तब है, जब देश में दो अक्टूबर 2014 से स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष रुचि वाले इस अभियान के तहत शहर, कस्बा और गांव में सड़कें, गलियां साफ की जा रही हैं। लोगों को अनुदान देकर शौचालय बनवाए जा रहे हैं, सालभर में कुपोषण दूर करने पर करीब 5,179 करोड़ रुपये खर्च करने वाला महिला एवं बाल विकास विभाग शौचालयों की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। ये वहीं केंद्र हैं, जिन्हें वर्ष 2030 तक कुपोषण मिटाने का जिम्मा सौंपा गया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में चार लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। इनमें गंभीर कुपोषितों की संख्या 70 हजार से अधिक है। हैरत की बात है कि सालाना इतनी राशि खर्च करने के बाद भी प्रदेश में 36 हजार 45 आंगनवाड़ी केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं।
इनमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मकान, किराए के निजी और सरकारी मकान भी शामिल हैं। जिन्हें हर साल बतौर किराया 5371 लाख रुपये भुगतान किया जा रहा है। 2030 केंद्र तो ऐसे हैं, जिनका अपना भवन ही नहीं है। पीने के पानी के मामले में भी इन केंद्रों की स्थिति अच्छी नहीं है। 10 हजार 700 केंद्रों में पानी की माकूल व्यवस्था नहीं है। 63 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में बाउंड्रीवाल नहीं है। इन केंद्रों में बच्चों का वजन लेने के लिए एक लाख 81 हजार से ज्यादा मशीनें हैं, पर इनमें से 35 हजार मशीनें खराब पड़ी हैं।
12,705 केंद्रों में शिक्षण सामग्री नहीं
आंगनवाड़ी केंद्रों में सुविधाओं के साथ सामग्री का भी अभाव है। हैरत है कि 12,705 केंद्रों में शिक्षण सामग्री नहीं है। 23,344 केंद्रों में भंडारण के लिए जगह नहीं है। 11,687 केंद्रों में चिकित्सा किट नहीं है। पांच हजार 155 केंद्र ऐसे भी हैं, जिनमें लंबाई मापने का यंत्र ही नहीं है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन तैयार कर रहे हैं। इस साल 10 हजार भवन तैयार हो जाएंगे। शेष अगले साल तैयार होंगे। 17 हजार केंद्रों में नल से पानी भेजने की व्यवस्था कर दी है। व्यवस्थाओं में सुधार लगातार हो रहा है। – अशोक शाह, प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग
