MP हाई कोर्ट ने संविदा कर्मियों के पक्ष में दिये 2 अहम फैसले, जनिये इन फैसलों को
जबलपुर, @आशीष शुक्ला। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो अहम फैसले दिए हैं एक फैसले में संविदा शाला शिक्षक की पात्रता नहीं तो चतुर्थ श्रेणी में अनुकंपा नियुक्ति देंने का आदेश दिया गया तो वहीं एक अन्य आदेश में हाई कोर्ट ने निरस्त संविदा कर्मी का तबादला निरस्त कर दिया।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि यदि याचिकाकर्ता संविदा शाला शिक्षक पद के लिए पात्र नहीं पाया जाता, तो उसे चतुर्थ श्रेणी में अनुकंपा नियुक्ति दी जानी चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता टीकमगढ़ निवासी हिमांशु खरे व रवींद्र सेन की ओर से पक्ष रखा गया। अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं के पिता रवींद्र कुमार खरे व नवल किशोर से की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी, वे दोनों क्रमश: अध्यापक व सहायत अध्यापक बतौर पदस्थ थे।
उस समय याचिकाकर्ता अवयस्क थे। बालिग होने के बाद दोनों की ओर से आवेदन किया गया। *लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण न होने के आधार पर आवेदन दरकिनार कर दिया। डीएड व बीएड न होने को भी आधार बनाया गया। इस पर याचिकाकर्ताओं ने रेखांकित कमियां पूरी कर लीं। इसके बावजूद उनको संविदा शाला शिक्षक नहीं बनाया गया। इसीलिए वे हाई कोर्ट की शरण में चले आए।
हाई कोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद इस निर्देश के साथ मामले का पटाक्षेप कर दिया कि यदि संविदा शाला शिक्षक नहीं बना सकते, तो चतुर्थ श्रेणी में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करें।
हाई कोर्ट ने निरस्त किया संविदा कर्मी का तबादला
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जिले के ब्लॉक में पदस्थ संविदा कर्मी अशोक पटेल का तबादला अनुचित पाते हुए निरस्त कर दिया। *यह आदेश संविदा नियुक्तियों को एक जिले से दूसरे जिले न भेजे जाने के नियम की रोशनी में सुनाया गया। एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी ने पक्ष रखा उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता संविदा आधार पर कार्यरत है। नियमानुसार संविदा नियुक्तियों को एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद ऐसा किया गया।
जिले के ब्लॉक से अन्य जिले भेजे जाने का तबादला आदेश निरस्त किए जाने के योग्य है। हाई कोर्ट ने तर्क से सहमत होकर याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश जारी कर दिया।