Friday, May 15, 2026
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MP के CM शिवराज सिंह चौहान ने इंटरनेट मीडिया पर बदली अपनी प्रोफाइल

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर इंटरनेट मीडिया पर अपने सभी अकाउंट की प्रोफाइल फोटो बदल दी। फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम सहित कू के प्रोफाइल पर अपनी आदिवासी वेशभूषा में फोटो लगा दी है।

साथ ही प्रोफाइल कवर पर जनजातीय गौरव दिवस का बैनर लगा हुआ है। रविवार दोपहर तक मुख्यमंत्री के इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर शिवराज सिंह चौहान की मास्क लगी हुई फोटो होती थी और प्रोफाइल कवर में आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश का बैनर दिखाई पड़ता था।

मुख्यमंत्री ने इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म पर यह परिवर्तन करीब डेढ़ साल बाद किया है। कोरोना संकट के शुरुआती दौर में मुख्यमंत्री ने मास्क लगाए हुए अपनी फोटो सभी प्रोफाइल पर लगाई थी। इसका उद्देश्य लोगों को कोरोना से बचाव में मास्क लगाने के लिए प्रेरित करना था। जनजातीय गौरव दिवस का कार्यक्रम मुख्यमंत्री सहित सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है, इस लिहाज से उन्होंने अपनी प्रोफाइल फोटो फिलहाल बदल ली है।

मुख्यमंत्री की यह फोटो रविवार सुबह राजधानी के जनजातीय संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम की है, जहां वह उन आदिवासी लोक कलाकारों से रूबरू हुए थे, जो प्रदेशभर से 15 नवंबर को मुख्य समारोह में अपनी प्रस्तुति देने के लिए आए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लोक कलाकारों के अलग-अलग समूहों के साथ नृत्य भी किया।

 

 

 इलाकों पर फोकस रहेगा। जोधपुर के स्वयंसेवी संस्था संभली ट्रस्ट की ओर से इस परियोजना को मूर्त रूप दिया जा रहा है जिसमें कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले नाबालिग के साथ यौन दुराचार के मामलों को देखते हुए पहल की गई है।

संभली के मैनेजिंग ट्रस्टी गोविन्द राठौड़ के अनुसार यह मुहीम 14 नवम्बर बाल दिवस के शुभ दिन प्रारम्भ की जा रही है जिसके जरिये बच्चों और इनके माता-पिताओं को जागरूक और सचेत करने का प्रयास किया जायेगा, ताकि इस तरह की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

गोविन्द बताते हैं, “इस प्रयास में हमारा उद्देश्य यह रहेगा कि बच्चों में ऐसे कुत्सित प्रयासों और हरकतों के प्रति समझ विकसित की जाए ताकि वे प्रारम्भ में उन्हें भाप सकें और अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दे सकें जिससे की ऐसी घटनाओं को रोका जा सके”।

कहते हैं कि इन जानकारियों और एक सपोर्ट सिस्टम (सहयोग तंत्र) के अभाव में बच्चे दुर्व्यवहार सहन करते हुए एक दिन विकृत मानसिकता वाले लोगों का शिकार हो जाते हैं। इसी के साथ माता-पिता को भी इस विषय की संवेदनशीलता को समझाते हुए उन्हें भी अपने बच्चों से बातचीत करते रहने और उनकी समस्याओं को समझने के प्रति जागरूक किया जाएगा ताकि बच्चे उनकी जानकारी साझा करने में किसी तरह की झिझक महसूस न करें।

इस परिदृश्य में अधिक चिंता की बात यह है कि शहरों से अधिक ये घटनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में घट रही हैं जिनके बारे में हम दावा करते रहे हैं कि 70% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

ट्रस्ट से जुड़े वीरेंद्र सिंह के अनुसार इस मुहीम में शहरी, विशेष रूप से निचले तबके की बस्तियों, और गावों की स्कूलों में बच्चों को सेफ और अनसेफ टच और शारीरिक-मौखिक रूप से की जाने वाली गलत और अश्लील हरकतों के प्रति समझ विकसित की जाएगी ताकि वे समझ सकें कि उनके साथ क्या हो रहा है।

इसी के साथ समाज के वरिष्ठों, प्रबुद्धजनों और लोकसेवकों के साथ गावों और शहरों के सामुदायिक केंद्रों पर एक जागरूकता अभियान भी चलाया जायेगा ताकि समाज में जाग्रति और सजगता के द्वारा इन घटनाओं की रोकथाम की दिशा में बढ़ा जा सके”।

समाज में आ रहे बदलाव और प्रतिदिन मीडिया में आ रही रिपोर्ट के बाद संस्थान ने इस दिशा में पहल करते हुए यह कदम उठाया है जिसे कि जिला प्रशासन की ओर से भी सहयोग मिल रहा है।

हालांकि दोषियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने में पुलिस व प्रशासन भी कोई कसर नहीं छोड़ रही, वहीं न्यायालय भी ऐसे घृणित अपराध के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे कर अपराधियों में भय पैदा करने और समाज को सन्देश देने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं, परन्तु इन सबके बावजूद भी ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। इसी के तहत अब आदर्श परियोजना के तहत ग्रामीण जागरूकता लाई जाएगी।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम