MP के मूल निवासी को सरकारी नौकरी पर राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने उठाये सवाल, CM को लिखा खुला खत

जबलपुर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रोजगार के लिए बड़ी घोषण करते हुए कहा है कि अब सिर्फ मध्यप्रदेश के युवाओं को ही सरकारी नौकरी दी जाएगी।

जिसको लेकर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने सवाल उठाए हैं। सीएम शिवराज को पत्र लिखते हुए उन्होंने कहा है कि आपका निर्णय अखबार की सुर्खियों में है कि राज्य में सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवा वर्ग का शत प्रतिशत आरक्षण निश्चित किया जाएगा। यह घोषणा लुभावन अवश्य प्रतीत होती है किन्तु इसे वर्तमान के धरातल पर उतारने में व्यावहारिक कठिनाइयों की अनदेखी की गयी हैं।
मैंने स्वयं भी प्रदेश के युवाओं के रोज़गार हेतु प्रदेश के बाहर पत्रायन पर रुदैव चिंता व्यक्त की है। जबलपुर इसका जीवंत उदाहरण है। निश्चित ही प्रदेश के संसाधनों पर सदैव पहला हक़ प्रदेश की जनता का है- यहाँ के युवाओं का है।

विवेक तन्खा ने आगे लिखा है कि आज हमारे प्रदेश में लगभग 28 लाख युवा बेरोजगार हैं। यह आंकड़ा सिर्फ सरकारी पंजीकृत युवा बेरोजगारों का है। हाल ही में भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय की संसद में प्रस्तुत सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां देश के अन्य राज्यों में बेरोजगारी का प्रतिशत घटा है, वहीं मध्यप्रदेश में बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ी हैं। कोविड19 के भीषण काल ने इस अनुपात को और बढ़ा दिया है।
प्रदेश में नौकरियों का हाल वाकई चिंताजनक है। आरक्षण संबंधी कोई भी घोषणा करने से पहले हमें याद रखना होगा, कि देश के संविधान के में छात्र सभी राज्य आरक्षण के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों से बंधे हुए हैं। कोई भी लोक लुभावन घोषणा करने के पहले आवश्यक निर्देशों का पालन करना सर्वथा आवश्यक है। प्रतीत होता है कि प्रदेश के युवाओं के समक्ष ऐसी घोषणा करने में आपने जल्दबाजी की एवं आरक्षण के सम्बन्ध में आवश्यक नियमों एवं क़ानून को ध्यान में नहीं रखा। आपने आज प्रदेश के सभी समाचार पत्रों में राज्य में ओबीसी वर्ग के 27% आरक्षण पर लगी रोक के सम्बन्ध में अवश्य पढ़ा होगा। यद्यपि यह मामला अभी माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है इसलिए मेरा इस विषय में कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। एक प्रजापालक के रूप में आपको कोई भी घोषणा करने के पूर्व इस घोषणा के प्रभाव का आकलन करना भी आवश्यक है।







