कमीशन के चक्कर में मरीजों को महंगी दवाएं लिख रहे हैं जिला अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर

कटनी। स्वाथ्य विभाग ने डाक्टरों को केवल जेनरिक दवाएं लिखने के आदेश दिए हैं लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर कमीशन के चक्कर में मरीजों को कंपनी की महंगी दवाएं लिख रहे हैं जो मरीजों को बाहर से लेनी पड़ रही हैं। हालांकि उसी साल्ट वाली सस्ती दवाएं सरकारी डिस्पेंसरी व जनऔषधि केन्द्रों में उपलब्ध होती हैं लेकिन दवा कंपनी से मिलने वाली 30 से 40 प्रतिशत कमीशन के चक्कर में मरीजों को परेशान किया जा रहा है। इसका खुलासा बीते दिनों जिला अस्पताल में मानसेवी चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे एक चिकित्सक के द्धारा सरकारी पर्ची पर लिखी गई बाहर की दवाओं से सामने आ चुका है। चिकित्सक ने सरकारी पर्ची पर न केवल बाहर की दवाएं लिखी थी बल्कि सरकारी पर्ची पर उस मेडिकल स्टोर्स का नाम भी लिखा था, जहां उनके द्धारा लिखी गई दवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि मानसेवी चिकित्सक का यह कृत्य सामने आने के बाद सिविल सर्जन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं लेकिन अभी भी कई चिकित्सक ऐसे हैं जो कमीशन के चक्कर में बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। यह बात और है कि ऐसा करने वाले अधिकांश चिकित्सक अपनी कलम बचाने सरकारी पर्ची की जगह अलग से एक सादे कागज पर बाहर की दवाएं लिख कर मरीजों को दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की माने तो जिला अस्पताल में पदस्थ अधिकांश चिकित्सकों की बाहर प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से सांठगांठ है। जिसके कारण उनके द्धारा लगातार बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। जिन्हे खरीदने गरीब तपके के मरीजों को अपनी जेब हल्की करनी पड़ रही है।
सरकार के आदेश दरकिनार, जनऔषधि केन्द्रों की बिक्री घटी
सरकार ने सरकारी डिस्पेंसरी में फ्री के अलावा सस्ते दाम पर दवाएं उपलब्ध करवाने के लिए जनऔषधि केन्द्र भी खोले हैं। जहां सस्ते दाम पर दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन सरकारी चिकित्सकोंं के द्धारा जनऔषधि केन्द्रों की दवाएं नहीं लिखने के कारण जनऔषधि केन्द्रों की रोजाना की कमाई भी घट गई है। यशभारत डॉट काम की पड़ताल में सामने आया कि एक बुजुर्ग को लिखी गई पर्ची पर अंदर से कई दवाएं फ्री थीं लेकिन इसके बावजूद उसे बाहर की दवाएं लिखी गईं।
बाहर व जनऔषधि केन्द्रों की दवाओं में फर्क
जिला अस्पताल की सरकारी डिस्पेंसरी में लगभग 150 तरह की फ्री में मिलने वाली दवाएं उपलब्ध हैं। वहीं जनऔषधि केन्द्र में आधे रेट से भी कम कीमत में मिलने वाली 100 से अधिक दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन मरीजों को इनका फायदा नहीं मिल रहा क्योंकि चिकित्सक कमीशन के चक्कर में मरीजों को बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं। एक जानकारी में बताया जाता है कि रोटो-साइड दवा बाहर 90 रुपए व जनऔषधि केन्द्र पर सेम साल्ट की डिपलोसोरेशे 20 रुपए, कैसबोर्न बाहर 100 रुपए तथा डिस्पेंसरी में फ्री व जनऔषधि केन्द्र में 20 रुपए है। हड्डियों के लिए लाइकोर्स बाहर 150 रुपए व अंदर लाइकोपिन 40 रुपए में उपलब्ध है। वहीं नू-एक्टिव बाहर 150 रुपए का पत्ता अंदर 40 रुपए, लीवोडैक्स पीने वाली बाहर 150 रुपए और अंदर 30 रुपए में उपलब्ध है। वहीं बच्चों के लिए कोजाइम सिरप बाहर 80 रुपए सिरप व अंदर सेम साल्ट का अनजाइम 20 रुपए, नैकनिप बाहर 85 रुपए व अंदर डिकलोएसपी 20 में उपलब्ध है।
ब्रांडेड दवाएं लिखने पर होगी कार्रवाई-सीएस
सिविल सर्जन डाक्टर यशवंत वर्मा ने कहा कि अगर कोई डाक्टर बाहरी मेडिकल स्टोर की ब्रांडेड दवाओं के नाम लिख रहा है तो इस संबंधी चेकिंग करवाकर कार्रवाई करेंगे। जल्द ही डाक्टरों की एक मीटिंग कर उन्हें मरीजों को डिस्पेंसरी या जनऔषधि का दवा लिखने को कहा जाएगा।








