Mishan karmayogi yojna: डिजिटल ट्रेनिंग में पिछड़ा MP, मिशन कर्मयोगी पर उठे सवाल
Mishan karmayogi yojna: डिजिटल ट्रेनिंग में पिछड़ा MP, मिशन कर्मयोगी पर उठे सवाल।नडिजिटल और प्रोफेशनल स्किल्स देने की योजना, लेकिन 53% शासकीय सेवक प्रशिक्षण से दूर। शासकीय सेवकों को अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील, सक्रिय और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई मिशन कर्मयोगी योजना का मध्यप्रदेश में क्रियान्वयन अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है।
Mishan karmayogi yojna: डिजिटल ट्रेनिंग में पिछड़ा MP, मिशन कर्मयोगी पर उठे सवाल
डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए इस योजना के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, सॉफ्ट स्किल्स और प्रोफेशनल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रगति धीमी नजर आ रही है।
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के कुल 6 लाख 77 हजार शासकीय सेवकों में से केवल 3 लाख कर्मचारियों ने ही डिजिटल प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि करीब 53 प्रतिशत कर्मचारी अब तक इस प्रशिक्षण से वंचित हैं।
इस स्थिति ने शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशिक्षण की गति नहीं बढ़ाई गई, तो डिजिटल प्रशासन और बेहतर सेवा वितरण का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
स्थिति की चुनौती:
प्रदेश में प्रशिक्षण के लिए संसाधन, समय और जागरूकता की कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं कई विभागों में तकनीकी प्लेटफॉर्म के उपयोग को लेकर भी कर्मचारियों में झिझक देखी जा रही है।
अब जरूरत इस बात की है कि सरकार मिशन कर्मयोगी को केवल योजना तक सीमित न रखकर, इसे प्रभावी तरीके से लागू करे ताकि शासकीय सेवक बदलते दौर के अनुरूप खुद को ढाल सकें।

