Monday, May 18, 2026
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ट्विशा शर्मा केस में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर! डॉक्टरों को नहीं दिया गया ‘फंदे का पट्टा’ (लिगेचर मटेरियल); पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर खड़े हुए सवाल

भोपाल:  ट्विशा शर्मा केस में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर! डॉक्टरों को नहीं दिया गया ‘फंदे का पट्टा’ (लिगेचर मटेरियल); पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर खड़े हुए सवाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली और पूरी जांच प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। फॉरेंसिक विज्ञान के बुनियादी नियमों को ताक पर रखते हुए, पुलिस ने शुरुआती पोस्टमार्टम के समय डॉक्टरों को वह ‘लिगेचर मटेरियल’ (फंदे में इस्तेमाल किया गया पट्टा या सामग्री) मुहैया ही नहीं कराया, जिससे ट्विशा का शव लटका हुआ मिला था।

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ट्विशा शर्मा केस में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर! डॉक्टरों को नहीं दिया गया ‘फंदे का पट्टा’ (लिगेचर मटेरियल); पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर खड़े हुए सवाल

इस गंभीर चूक के सामने आने के बाद ट्विशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश दोनों पर ही बड़े सवालिया निशान लग गए हैं।

फॉरेंसिक नियमों की उड़ीं धज्जियां: क्यों अहम है लिगेचर मटेरियल?

फॉरेंसिक और मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब भी कोई मामला संदिग्ध फांसी या आत्महत्या का होता है, तो शव के साथ उस फंदे (सामग्री) को भी डॉक्टरों के पास भेजना कानूनी और तकनीकी रूप से अनिवार्य होता है।

  • हत्या और आत्महत्या का अंतर: डॉक्टर फंदे की चौड़ाई, उसकी बनावट और उसके दबाव से गले पर बने निशानों (Ligature Mark) का मिलान करते हैं।

  • अहम वजह: इसी जांच से यह साफ होता है कि मौत वाकई फांसी लगाने से हुई है या फिर पहले किसी अन्य तरीके से हत्या की गई और बाद में मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे पर लटका दिया गया।

ट्विशा शर्मा के मामले में पुलिस की इस ढिलाई की वजह से शुरुआती पोस्टमार्टम के दौरान यह बेहद जरूरी तकनीकी जांच हो ही नहीं सकी, जिससे अब तक की पूरी थ्योरी संदिग्ध हो गई है।

लापरवाही के खुलासे के बाद जागी पुलिस; अब AIIMS भेजे गए सबूत

मामला मीडिया में उछलने और चौतरफा घिरने के बाद भोपाल पुलिस ने आनन-फानन में उस पट्टे को एम्स (AIIMS) भोपाल की फॉरेंसिक टीम को सौंप दिया है। अब एम्स के विशेषज्ञ ट्विशा के गले के निशानों और उस पट्टे की बनावट का दोबारा मिलान (Corroboration) करेंगे। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की यह नई रिपोर्ट ही अब तय करेगी कि यह मामला आत्महत्या का है या साज़िश के तहत की गई हत्या का।

“आरोपियों के रसूख के आगे घुटने टेक रही पुलिस”— मृतका के पिता के गंभीर आरोप

इस नए खुलासे के बाद मृतका ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने पुलिस पर शुरू से ही केस को दबाने और गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप दोहराए हैं। पिता का सीधा आरोप है कि चूंकि ट्विशा की सास एक रिटायर्ड जज हैं और पति वकील हैं, इसलिए उनके प्रभावशाली बैकग्राउंड और रसूख के दबाव में आकर जांच को लगातार प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि जब इतने बड़े सबूत को ही छुपा लिया गया, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जाए?

अब अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

पुलिस अधिकारियों ने दबी जुबान में माना है कि मौत के प्राथमिक कारणों की पुष्टि भले ही सामान्य पोस्टमार्टम से हो जाती है, लेकिन अदालत में केस को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए लिगेचर मटेरियल की फॉरेंसिक रिपोर्ट सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत होती है। फिलहाल, इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) और मृतका के परिजनों के साथ-साथ आम जनता की निगाहें भी एम्स भोपाल की आने वाली फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मौत के पीछे छिपे सबसे बड़े राज का पर्दाफाश करेगी।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि