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World IVF Day 2025: IVF प्रोसेस से जानिए उम्मीद की राह -जब स्वयं eggs न चलें, डोनर एग से सफलता के 50–70% संकेत

World IVF Day 2025: IVF प्रोसेस से जानिए उम्मीद की राह -जब स्वयं eggs न चलें, डोनर एग से सफलता के 50–70% संकेत

World IVF Day 2025: IVF प्रोसेस से जानिए उम्मीद की राह -जब स्वयं eggs न चलें, डोनर एग से सफलता के 50–70% संकेत। क्या समयपूर्व मेनोपॉज होने का मतलब है कि आप कभी मां नहीं बन सकतीं? बिल्कुल नहीं. मेडिकल साइंस ने अब वो रास्ते खोल दिए हैं जहां उम्मीद अब भी बाकी है. जानिए एक ऐसी ही महिला की कहानी, जिसने हिम्मत नहीं हारी और डोनर एग के जरिए मां बनने का सपना पूरा किया।

World IVF Day 2025: IVF प्रोसेस से जानिए उम्मीद की राह -जब स्वयं eggs न चलें, डोनर एग से सफलता के 50–70% संकेत समयपूर्व मेनोपॉज यानी कम उम्र में ही महिला के पीरियड्स और फर्टिलिटी का रुक जाना- एक गंभीर लेकिन अब इलाज योग्य स्थिति है. 29 साल की प्रिया (बदला हुआ नाम) को जब इस समस्या का पता चला तो उनका मां बनने का सपना टूटता नजर आया, लेकिन डोनर एग के जरिए IVF तकनीक ने उन्हें दोबारा उम्मीद दी. सही मेडिकल सलाह, भावनात्मक सहारा और दृढ़ निश्चय के साथ उन्होंने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया.

प्रिया (बदला हुआ नाम) भी हर आम महिला की तरह अपने जीवन में मां बनने का सपना देख रही थीं. शादी के कुछ साल बाद उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया, लेकिन तीन साल तक लगातार कोशिशों के बावजूद उन्हें गर्भधारण नहीं हुआ. जब डॉक्टर से सलाह ली और पूरी जांच करवाई, तब उन्हें यह सुनकर गहरा झटका लगा कि वह समयपूर्व मेनोपॉज (Premature Menopause) की शिकार हो चुकी हैं और वो भी मात्र 29 साल की उम्र में. आगे पढ़ें कि प्रिया के साथ ऐसा क्यों हुआ?

डोनर एग का क्या होता है रोल

इस समस्या के बाद परेशान हो चुकी प्रिया की काउंसलिंग स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वैशाली शर्मा ने की. उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि अब प्रिया के अपने अंडों से गर्भधारण करना संभव नहीं है, लेकिन डोनर एग (Donor Egg IVF) की मदद से मां बनने की संभावना अब भी है. डॉ. वैशाली ने न सिर्फ मेडिकल जानकारी दी बल्कि पूरे समय प्रिया को मानसिक तौर पर भी तैयार किया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि डोनर एग के ज़रिए IVF करवाने से कई महिलाएं पहले भी सफलतापूर्वक मां बन चुकी हैं.

IVF प्रोसेस में क्या होता है?

IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें महिला के एग (अंडाणु) और पुरुष के स्पर्म को शरीर के बाहर लैब में मिलाया जाता है ताकि भ्रूण (एंब्रायो) बन सके. जब भ्रूण तैयार हो जाता है तो उसे महिला के गर्भाशय (uterus) में डाला जाता है ताकि वह वहीं विकसित हो सके और प्रेग्नेंसी शुरू हो जाए.

VF प्रक्रिया में भ्रूण को महिला के गर्भाशय (uterus) में ट्रांसफर करने के बाद अगला कदम होता है प्रेग्नेंसी कंफर्म करना. आमतौर पर ट्रांसफर के 10 से 14 दिन बाद एक ब्लड टेस्ट (Beta hCG) किया जाता है ताकि यह पता चल सके कि भ्रूण गर्भाशय की दीवार से ठीक से चिपका है या नहीं और प्रेग्नेंसी शुरू हुई है या नहीं.

अगर टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो महिला की नियमित सोनोग्राफी और डॉक्टर की निगरानी शुरू होती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चा ठीक से ग्रो कर रहा है. शुरूआती हफ्तों में हार्मोनल सपोर्ट दवाएं दी जाती हैं ताकि प्रेग्नेंसी मजबूत बनी रहे. अगर सब कुछ सही रहता है, तो प्रेग्नेंसी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती है जैसे किसी भी नेचुरल प्रेग्नेंसी में होती

मेडिकल साइंस ने बढ़ा ही उम्मीदें

अगर आप या आपकी कोई परिचित महिला समयपूर्व मीनोपॉज जैसी परेशानी से जूझ रही हैं, तो डरें नहीं. मेडिकल साइंस आज इतने आगे बढ़ चुका है कि कई विकल्प खुले हैं. किसी योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें और अपनी उम्मीदों को जिंदा रखें. हर स्त्री को मातृत्व का अधिकार है और यह सपना अब अधूरा नहीं रहना चाहिए।World IVF Day 2025: IVF प्रोसेस से जानिए उम्मीद की राह — जब स्वयं eggs न चलें, डोनर एग से सफलता के 50–70% संकेत

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