Katni : निर्माणी व एनकेजे में नहीं थम रहा सूदखोरी का गोरखधंधा

कटनी। पुलिस व प्रशासन की सख्ती के बावजूद शहर व उपनगरीय क्षेत्र में सूदखोरी का गोरखधंधा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सूदखोरी के लिए बदनाम आयुध निर्माणी व एनकेजे क्षेत्र में आज भी सूदखोर सक्रिय हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों व जरूरतमंदों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए सूदखोर 10 से 40 प्रतिशत मासिक ब्याज पर सूदखोरी का धंधा कर रहे हैं। इन सूदखोरों में पुलिस कार्रवाई का भी खौफ नहीं है।
रकम उधार देते समय पहले ही मासिक ब्याज की कटौती करने वाले सूदखोर ब्याज मिलने में विलंब होने पर चक्रवृद्घि ब्याज वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं सूदखोर कर्जदारों की घर गृहस्थी का सामान तक उठा ले जाते हैं।
आयुध निर्माणी व एनकेजे क्षेत्र में अपना जाल फैलाते हुए सूदखोरों ने अनेक कर्मचारियों, पेंशनर व कर्मचारियों की पेंशनर विधवाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। उनका मासिक वेतन व पेंशन तक सूदखोर हड़प रहे हैं।
सूदखोरों से परेशान कई कर्जदार पुलिस थानों में शिकायत करते हैं लेकिन सख्त कार्रवाई के अभाव में ज्यादातर शिकायतें कागजों में ही दम तोड़ देती हैं।
पिछले माह एनकेजे पुलिस भरपूर पेंशन मिलने के बावजूद सूदखोर के चंगुल में फंसकर लाचारी का जीवन जी रही एक वृद्धा की शिकायत पर कार्रवाई करके सूदखोरों में कुछ हड़कंप मचाया था लेकिन इस माह फिर एनकेजे व आयुध निर्माणी क्षेत्र स्थित राष्ट्रीयकृत बैंक व एटीएम काउंटर के बाहर सूदखोर सक्रिय दिखे। कोरे स्टाम्प और चेक पर हस्ताक्षर
कर्जदारों पर शिकंजा कसने के लिए सूदखोर उनसे कोरे स्टाम्प व बैंक चेक पर हस्ताक्षर करवाकर अपने पास रख लेते हैं। कर्जदार मजबूरी के चलते कोरे स्टाम्प व चेक पर हस्ताक्षर कर देता है। किसी आर्थिक समस्या के चलते यदि कर्जदार समय पर ब्याज नहीं दे पाया तो सूदखोर ब्लैंक चेक पर मनमाना रकम लिखकर कानूनी दांवपेंच में फंसाने की धमकी देते हैं। कई सूदखोर तो चेक पर मनमानी रकम लिखकर उसे बैंक से अनादरित करवाते हुए कर्जदारों को कानूनी शिकंजे में भी फंसा चुके हैं।
वेतन व पेंशन आते ही एटीएम में लगती है भीड़
आयुध निर्माणी के एक कर्मचारी ने बताया कि हर माह 1 से 10 तारीख तक सूदखोर एटीएम मशीनों के आसपास सक्रिय रहते हैं। कर्जदार फैक्ट्री कर्मियों व पेंशनरों का एटीएम जप्त कर सूदखोर अपने पास रख लेते हैं और बैंक खाते में वेतन व पेंशन पहुंचते ही एटीएम से रकम निकाल लेते हैं। कई कर्मचारी व पेंशनर ऐसे हैं जो मासिक वेतन व पेंशन का 10 प्रतिशत हिस्सा भी घर नहीं ले पाते। सूदखोरों के कारण कई कर्मचारी व पेंशनर नारकीय यातना का सामना करने मजबूर हैं।








