कटनी। चेक बाउंस होने के एक मामले में न्यायालय ने अभियुक्त को ब्याज सहित राशि अदा करने एवं छ माह के कठोर कारावास के दंड से दंडित किया है। राशि भुगतान में व्यतिक्रम होने पर अभियुक्त को छ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय द्वारा यह दंड परक्राम्य लिखित अधिनियम की धारा 138 के तहत अभियुक्त के दोषी सिद्ध हो जाने पर सुनाई गई है। प्रकरण के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरूनानक वार्ड निवासी मोतीलाल मोटवानी पिता स्व. नानकराम मोटवानी एवं कैरिनलाइन माधवनगर निवासी अजय कुमार लीलानी, पिता कन्हैयालाल लीलानी आपस में एक-दूसरे से परिचित थे। मई 2015 में कपड़े के व्यवसाय के लिए अजय कुमार लीलानी ने मोतीलाल मोटवानी से तीन लाख रूपए उधार लिए थे। उधार रकम का भुगतान डेढ़ महीने के भीतर किये जाने का वचन दिया गया था। साथ ही 75-75 हजार के 4 चेक जो एक्सिस बैंक के नाम थे। अलग अलग तिथियों में जारी किये गये थे। व्यवसायी मोतीलाल मोटवानी द्वारा निर्धारित अवधि के बाद 27 जून 2015 में जब उक्त चेकों को भुगतान के लिए बैंक में जमा कराया गया तो अभियुक्त अजय लीलानी के खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनाद्रित होकर वापस कर दिए गए। बैंक द्वारा चेक लौटा दिए जाने के बाद व्यवसायी मोतीलाल मोटवानी द्वारा इसकी जानकारी अजय कुमार लीलानी को दी गई पर अजय लीलानी इसे गंभीरता से नहीं लिया। बाद में मोतीलाल मोटवानी द्वारा कानूनी नोटिस से अभियुक्त अजय कुमार लीलानी को भेजा गया। जिसका भी समुचित उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। अंत में मोतीलाल मोटवानी द्वारा परक्राम्य लिखित अधिनियम की धारा 138 के तहत प्रकरण अपने अधिवक्ता मनीष शुक्ला के माध्यम से प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट रविन्द्र कुमार सोनी के यहां प्रस्तुत किया गया। प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियुक्त अजय कुमार लीलानी, मोतीलाल मोटवानी से तीन लाख रूपए उधार लेने की बात से पूरी तरह मुकर गया। इतना ही नहीं अभियुक्त ने यह भी कहा कि उसने 75-75 हजार के कोई भी चैक जारी नहीं किये न ही उसका एक्सिस बैंक शाखा में कोई खाता है। अभियुक्त ने उल्टे यह आरोप लगाया कि व्यवसायी मोतीलाल मोटवानी ने बैंक अधिकारी से मिलीभगत कर एक्सिस बैंक में उसके नाम का खाता खुलवा लिया है। अभियुक्त अजय कुमार लीलानी द्वारा अपनी बात की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये जा सके। उसके अधिवक्ता के तर्कों से भी न्यायालय संतुष्ट नहीं हो सका। पूरे प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियुक्त अजय कुमार लीलानी को परक्राम्य अधिनियम की धारा 138 के तहत वचनभंग का दोषी पाया और एक जून 2015 से 9 प्रतिशत ब्याज सहित कुल 4 लाख 25 हजार 750 रूपए की भरपाई के आदेश दिए साथ ही 6 माह के कठोर करावास का दंड भी दिया। रकम अदायगी में व्यतिक्रम होने पर 6 माह के अतिरिक्त कठोर करावास का प्रावधान भी न्यायालय द्वारा पारित आदेश में किया गया है।