Katni : कुटेश्वर माइंस के प्रभावित किसान आंदोलन की राह पर
बरही। स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया के उपक्रम कुटेश्वर माइंस की वादाखिलाफी व विजयराघवगढ़ के तत्कालीन तहसीलदार सुधाकर सिंह बघेल द्वारा बिना मुआवजा दिए व बिना किसानों को सूचित किए ही किसानों की जमीन कुटेश्वर माइंस प्रबंधन के नाम कर दी गईए जिससे आक्रोशित प्रभावित किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आज से धरना.प्रदर्शन, आंदोलन प्रारम्भ कर दिया है। किसानों के इस आंदोलन से कंपनी का उत्पादन बंद हो गया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस अमला बज्र वाहन के साथ तैनात रहा, तो वहीं प्रशासनिक अमला किसानों को समझाइश देने में जुटा रहा।आंदोलन का यह है मुख्य मुद्दा
किसानों का आरोप है कि तत्कालीन विजयराघवगढ़ तहसीलदार सुधाकर सिंह बघेल व तात्कालीन हल्का पटवारी ने बिना किसानों की अनुमति एवं भू अर्जन के ही किसानों की जमीनों को कॉलम नंबर 12 में सुधार करते हुए कम्पनी प्रबंधन का नाम दर्ज कर दिया है। पीड़ित किसानों का आरोप है कि 2 नवंबर 2015 को राजस्व प्रकरण क्रमांक 06/ए-6 2015.16 को तत्कालीन तहसीलदार सुधाकर सिंह बघेल और हल्का पटवारी ने माइंस प्रबंधन से सांठ.गांठ करते हुए बिना किसानों की अनुमति एवं बिना किसी सूचना के ग्राम गैरतलाई, जारारोड़ा एवं मड़वा के किसानों की जमीनों में कॉलम नम्बर 12 में भूमि अधिग्रहित दर्ज कर दी गई हैए जिसके लिए किसानों को किसी भी प्रकार से इस्तहार, स्थल पंचनामा व किसानों को किसी भी तरह की सूचना नही दी गई।
इधर वर्तमान हल्का पटवारी
पटवारी अरुण कुमार आम ने सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 8645606 का प्रतिवेदन 28 सितंबर 2019 को बना कर तहसीलदार विजयराघवगढ़ को दियाए जिसमे उल्लेख किया कि गैरतलाई के कृषको की भूमि पर वर्तमान समय मे कंपनी स्थापित हैए जिसका अधिग्रहण भू.राजस्व संहिता 1959 की धारा 247-4 के तहत किया गया है तथा शेष भूमि का भूअर्जन अधिनियम 1894 के तहत किया है, जो पट्टे की अवधि है, जो 20 साल के लिए खनिज प्रयोजन के लिए मान्य थी, जिसका कंपनी के दमनकारी नीतियों से बिना किसानों की अनुमति से बढ़ा लिया है।
इनका कहना है
आंदोलन के संबंध में मौके पर मोर्चा संभाले बरही थाना प्रभारी राजेश दुबे का कहना था कि किसी भी तरह की विवाद की स्थिति नही हैए एसडीएम व माइंस प्रबंधन के आने के बाद किसानों से चर्च होगी। परिवहन जारी है।

