Wednesday, May 6, 2026
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बर्तन मांजने वाली ‘कालिता’ अब बन गईं माननीय विधायक! बीजेपी की प्रचंड जीत के बीच सबसे अनोखी कहानी; जीत के बाद घर आकर खाया ‘आलू-पोटोलर झोल

बर्तन मांजने वाली ‘कालिता’ अब बन गईं माननीय विधायक! बीजेपी की प्रचंड जीत के बीच सबसे अनोखी कहानी; जीत के बाद घर आकर खाया ‘आलू-पोटोलर झोल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने जहाँ राज्य की सत्ता बदल दी है, वहीं एक ऐसी कहानी भी सामने आई है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह कहानी है कालिता मांझी की, जो कल तक दूसरों के घरों में बर्तन मांजती और सफाई करती थीं, लेकिन आज वह आउसग्राम सीट से नवनिर्वाचित विधायक हैं।

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बर्तन मांजने वाली ‘कालिता’ अब बन गईं माननीय विधायक! बीजेपी की प्रचंड जीत के बीच सबसे अनोखी कहानी; जीत के बाद घर आकर खाया ‘आलू-पोटोलर झोल

₹2,500 की पगार से विधानसभा तक का सफर

गुस्कारा नगर पालिका की रहने वाली कालिता मांझी चार घरों में काम करके बमुश्किल अपना गुजारा करती थीं। उनकी मासिक आय महज 2,500 से 4,500 रुपये के बीच थी। उनके पति पेशे से प्लंबर हैं। इतनी साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद, उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए अपने प्रतिद्वंदी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी।

जीत के बाद भी सादगी: नहीं बदला अंदाज

कालिता की सादगी का आलम यह है कि विधायक बनने की आधिकारिक घोषणा के बाद जब वह घर लौटीं, तो कोई भव्य पार्टी नहीं हुई।

  • रात का खाना: उन्होंने थकान और भूख के बीच अपनी सास के हाथ का बना साधारण ‘आलू-पोटोलर झोल’ (आलू और परवल की सब्जी) खाया।

  • अगले दिन की दिनचर्या: मंगलवार को विधायक बनने के अगले ही दिन वह सुबह उठकर अपने घर के कपड़े धोने और सफाई में जुट गईं। चूंकि वह मंगलवार का व्रत रखती हैं, इसलिए उन्होंने कुछ नहीं खाया।

पीएम मोदी के भाषणों से बदली किस्मत

कालिता बताती हैं कि उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से मिली। वह काम के साथ-साथ पार्टी के हर कार्यक्रम में हिस्सा लेती थीं। साल 2021 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जनता के बीच डटी रहीं।

शपथ ग्रहण के लिए नहीं थी सुंदर साड़ी

कालिता ने भावुक होते हुए बताया कि वह अपने पति और बेटे को कोलकाता में शपथ ग्रहण समारोह में ले जाना चाहती हैं, लेकिन उनके पास इस खास मौके के लिए कोई अच्छी साड़ी नहीं थी। उनकी इसी सादगी को देख उनके मालिक कृष्णा पात्रा, जिनके घर वह 20 साल से काम कर रही हैं, उन्होंने कालिता को एक सुंदर साड़ी उपहार में देने का फैसला किया है।

बंगाल में खिला ‘कमल’

बता दें कि इस चुनाव में बीजेपी ने 294 सीटों में से 206 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है। कालिता जैसी जमीन से जुड़ी उम्मीदवार की जीत ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता का जुड़ाव ही सबसे बड़ी ताकत

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि